कोल माइन और कचरे पर UNEP की पैनी नजर!
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के इंटरनेशनल मीथेन एमिशन ऑब्जर्वेटरी (IMEO) ने मीथेन अलर्ट एंड रिस्पांस सिस्टम (MARS) का विस्तार किया है। अब यह सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल करके कोल माइंस और कचरा प्रबंधन सुविधाओं से निकलने वाले मीथेन लीकेज का भी पता लगाएगा। इससे पहले, MARS मुख्य रूप से ऑयल और गैस ऑपरेशन्स पर ध्यान केंद्रित कर रहा था। यह कदम 4 मई, 2026 को उठाया गया है, क्योंकि हालिया स्टडीज से पता चला है कि लैंडफिल (कचरा भराव क्षेत्र) मीथेन के बड़े स्रोत हैं। खास बात यह है कि दुनिया के टॉप 3 सबसे ज्यादा उत्सर्जन करने वाले साइट्स में भारत के दो लैंडफिल शामिल हैं।
MARS 30 से ज़्यादा सैटेलाइट्स से डेटा का उपयोग करके 'सुपर-एमिटर्स' यानी बड़े मीथेन उत्सर्जन स्रोतों का पता लगाता है, जिन्हें स्पेस से भी देखा जा सकता है। इन सूचनाओं को देशों और उद्योगों को भेजा जाता है ताकि वे तुरंत कार्रवाई कर सकें। अब तक, यह सिस्टम ऑयल एंड गैस मीथेन पार्टनरशिप 2.0 (OGMP 2.0) के तहत ऑयल और गैस साइट्स पर केंद्रित था। इस विस्तार से सिस्टम की पहुंच काफी बढ़ गई है।
सैटेलाइट टेक्नोलॉजी से मीथेन ट्रैक करना हुआ आसान
मीथेन एक खतरनाक ग्रीनहाउस गैस है, जो शॉर्ट टर्म में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की तुलना में 80 गुना से ज़्यादा असरदार है। 2022 में लॉन्च होने के बाद से, MARS ने 11 देशों में 41 एक्शन शुरू करवाए हैं, जिससे हर साल लाखों कारों के बराबर उत्सर्जन को रोका जा सका है। हालांकि, एक बड़ी चिंता यह है कि MARS की चेतावनियों पर कितनी जल्दी प्रतिक्रिया दी जाती है। 2025 के अंत तक, लगभग 12% चेतावनियों पर ही कार्रवाई हुई थी। यह लीक का पता लगाने और उसे ठीक करने के बीच एक बड़ी खाई को दर्शाता है।
नए लक्ष्य: कोल और वेस्ट सेक्टर
कोल माइंस को शामिल करने से एक ऐसे सेक्टर को टारगेट किया गया है जहाँ डेटा की कमी है लेकिन उत्सर्जन काफी ज़्यादा हो सकता है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि वर्तमान टेक्नोलॉजी का उपयोग करके कोल माइन मीथेन उत्सर्जन का आधे से ज़्यादा हिस्सा कम किया जा सकता है।
दूसरी ओर, कचरा प्रबंधन सेक्टर तेज़ी से बढ़ रहा है। ग्लोबल वेस्ट मैनेजमेंट मार्केट 2033 तक $2.3 ट्रिलियन से अधिक होने की उम्मीद है। Waste Management Inc. (WM) जैसी कंपनियां इस सेक्टर की प्रमुख खिलाड़ी हैं, जिनका मार्केट वैल्यू $92 बिलियन के करीब है।
चुनौतियाँ अभी भी बाकी
टेक्नोलॉजी में प्रगति के बावजूद, बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। पता लगाए गए 'सुपर-एमिटर्स' कुल उत्सर्जन का केवल एक छोटा सा हिस्सा हैं, यानी समस्या का वास्तविक पैमाना कहीं अधिक बड़ा हो सकता है। इसके अलावा, MARS अलर्ट पर धीमी प्रतिक्रिया दर यह दर्शाती है कि सरकारें और उद्योग अक्सर लीक का पता चलने के बाद पर्याप्त तेज़ी से कार्रवाई नहीं करते हैं। MARS के प्रभावी होने के लिए, अलर्ट को वास्तविक कार्रवाई में बदलना होगा, जिसके लिए सरकारों और उद्योगों से ज़्यादा प्रतिबद्धता की आवश्यकता है।
