केन्या की राजधानी नैरोबी में हुई UN की SBSTTA 28 बैठक, वैश्विक जैव विविधता (Biodiversity) के लक्ष्यों पर कुछ प्रगति के साथ समाप्त हुई, लेकिन सिंथेटिक बायोलॉजी के नियमन (Regulation) पर मतभेद अनसुलझे रह गए। टेक्नोलॉजी शेयरिंग और इकोलॉजिकल सेफ्टी जैसे मुद्दों पर असहमति ने आगामी COP17 शिखर सम्मेलन से पहले तनाव का माहौल बना दिया है।
सिंथेटिक बायोलॉजी पर क्यों फंसा पेंच?
1 अगस्त 2026 को नैरोबी में समाप्त हुई Subsidiary Body on Scientific, Technical and Technological Advice (SBSTTA 28) की बैठक में सिंथेटिक बायोलॉजी के शासन (Governance) को लेकर कई बड़े सवाल अनुत्तरित रह गए। यह बैठक अगले COP17 बायोडायवर्सिटी शिखर सम्मेलन के लिए एक महत्वपूर्ण तैयारी के तौर पर देखी जा रही थी, जो अर्मेनिया के येरेवान में होनी है।
डेलिगेट्स ने कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क के कई तकनीकी पहलुओं पर तो सहमति बना ली, लेकिन जेनेटिक इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी के नियमन पर गंभीर मतभेद बने रहे। 2022 में अपनाया गया कुनमिंग-मॉन्ट्रियल फ्रेमवर्क, प्रकृति संरक्षण के लिए वैश्विक खाका है, जिसमें 2030 तक के लिए 23 लक्ष्य निर्धारित हैं। हालांकि, 129 देशों के हालिया आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक प्रयास तय समय से पीछे चल रहे हैं। विशेषज्ञों ने अंतर्राष्ट्रीय फंडिंग (Funding) में कमी और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (Technology Transfer) की सीमित पहुंच को इन लक्ष्यों को पूरा करने में विकासशील देशों के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा बताया है।
सिंथेटिक बायोलॉजी के शासन में चुनौतियां
नैरोबी बैठक में मुख्य बहस सिंथेटिक बायोलॉजी के तेजी से हो रहे विकास पर केंद्रित रही। इस तकनीक में नए बायोलॉजिकल पार्ट्स या संशोधित जीवों का निर्माण किया जाता है। जहां इसके समर्थक इसे सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग और इकोलॉजिकल रिस्टोरेशन के लिए क्रांतिकारी मानते हैं, वहीं इसके विरोधी इसे अपरिवर्तनीय पर्यावरणीय क्षति और इन परिणामों की निगरानी के लिए वैश्विक नियामक ढांचे की कमी पर चिंता जता रहे हैं।
बातचीत में सबसे बड़ी बाधा 'इक्विटेबल बेनिफिट-शेयरिंग' (Equitable Benefit-Sharing) का मुद्दा रहा। कई विकासशील देशों ने चिंता जताई कि वर्तमान पेटेंट (Patent) परिदृश्य और अनुसंधान क्षमताएं कुछ अमीर देशों और मल्टीनेशनल कॉर्पोरेशन्स (Multinational Corporations) के हाथों में केंद्रित हैं। उन्होंने इन वैज्ञानिक प्रगति तक उचित पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य तंत्र की मांग की है, यह तर्क देते हुए कि उन्हें संबंधित तकनीकी लाभों के बिना पर्यावरणीय जोखिमों के प्रति असमान रूप से उजागर नहीं किया जाना चाहिए।
COP17 से पहले आगे की राह
सिंथेटिक बायोलॉजी के लिए एक एक्शन प्लान पर बातचीत बिना किसी आम सहमति के समाप्त हो गई, कि क्या इस टेक्नोलॉजी की निगरानी के लिए नए विशेष विशेषज्ञ निकाय (Expert Bodies) स्थापित किए जाएं। इन अनसुलझे दस्तावेजों और सिफारिशों को अब Subsidiary Body on Implementation (SBI-7) को भेजा जा रहा है, जो वर्तमान में नैरोबी में ही बैठक कर रहा है। वहां होने वाली चर्चाएं COP17 के औपचारिक एजेंडे को आकार देने में महत्वपूर्ण होंगी। बायोटेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल्स और औद्योगिक कृषि जैसे क्षेत्रों के निवेशक और हितधारक इन विकासों पर नजर रख सकते हैं, क्योंकि भविष्य के किसी भी वैश्विक नियमन से दुनिया भर में जेनेटिक इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी के लिए लाइसेंसिंग, अनुसंधान और पेटेंट आवश्यकताओं में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है।
