केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के 'स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026' में दिल्ली को **21वीं** रैंक मिली है, जो बेंगलुरु और श्रीनगर से बेहतर है। यह रैंकिंग प्रदूषण के वास्तविक स्तर पर नहीं, बल्कि सरकार द्वारा किए गए नीतिगत प्रयासों और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के आधार पर तय की गई है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 7 सितंबर, 2026 को 'इंटरनेशनल डे ऑफ क्लीन एयर फॉर ब्लू स्काइज' के मौके पर 5वां स्वच्छ वायु सर्वेक्षण जारी किया। इस सालाना सर्वे में देश के 130 शहरों को शामिल किया गया, जिनमें रैंकिंग का आधार हवा की गुणवत्ता नहीं, बल्कि सरकार की नीतियां और उनके कार्यान्वयन (implementation) रहे।
रैंकिंग का गणित
10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों की कैटेगरी में लखनऊ ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि इंदौर और जबलपुर क्रमशः दूसरे और तीसरे नंबर पर रहे। दिल्ली, जहां सर्दियों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक हो जाता है, इस सर्वे में 21वें स्थान पर रही। हैरानी की बात यह है कि दिल्ली इस सूची में श्रीनगर (26वें) और बेंगलुरु (32वें) जैसे शहरों से आगे है।
यह सर्वे क्या दर्शाता है?
यह सर्वेक्षण मुख्य रूप से 'नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम' (NCAP) की प्रगति को मापने का जरिया है। इसमें सड़क की धूल, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, औद्योगिक उत्सर्जन नियंत्रण और इलेक्ट्रिक बसों को शामिल करने जैसे मानकों को देखा जाता है। इसका मतलब यह है कि अगर कोई शहर इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करता है, तो उसकी रैंकिंग सुधर जाती है, भले ही प्रदूषण का लेवल वैसा ही बना रहे।
निवेशकों के लिए संकेत
इन्वेस्टर्स और इंडस्ट्री के लिए यह रैंकिंग सरकार के खर्च की प्राथमिकताओं को दर्शाती है। NCAP के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों, वेस्ट प्रोसेसिंग और एयर स्क्रबर जैसी तकनीकों की मांग आने वाले समय में बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, असली चुनौती इन नीतियों को जमीन पर उतारकर PM10 और PM2.5 के स्तर को कम करना है, जिस पर अब निवेशकों की नजर रहेगी।
