Faridabad Lake: गंदे पानी से 1,000 पेड़ खत्म! भूजल प्रदूषण का भी खतरा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Faridabad Lake: गंदे पानी से 1,000 पेड़ खत्म! भूजल प्रदूषण का भी खतरा

फरीदाबाद में पर्यावरणविदों ने आरोप लगाया है कि एक स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से निकले ट्रीटेड सीवेज वॉटर ने बडखल झील के पास करीब 1,000 पेड़ मार दिए हैं। आसपास के गांवों में भूजल प्रदूषण की चिंताएं भी बढ़ रही हैं, जहां के निवासी बदबूदार, काला पानी आने की शिकायत कर रहे हैं। हालांकि, अधिकारी दावा कर रहे हैं कि ट्रीटेड पानी मानकों को पूरा करता है और जलकुंभी व गंदगी को वजह बता रहे हैं।

फरीदाबाद झील बनी पर्यावरण चिंता का विषय

फरीदाबाद में पर्यावरणविद बडखल झील की हालत को लेकर अलार्म बजा रहे हैं। उनका आरोप है कि एक नए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से छोड़े गए ट्रीटेड सीवेज वॉटर की वजह से झील के पास लगभग 1,000 पेड़ मर गए हैं। जो पेड़ मरे हैं उनमें इमली, बरगद, आम और अमरूद जैसी औषधीय और फलों की किस्में शामिल हैं। ये पेड़ पारसन मंदिर के जंगल क्षेत्र और आसपास के मंदिर परिसरों में स्थित थे।

पानी की गुणवत्ता पर विवाद

स्थानीय कार्यकर्ताओं का दावा है कि झील में छोड़ा गया पानी काला है, जिससे बदबू आती है और इसकी अम्लता (acidity) व पीएच (pH) लेवल काफी बढ़ा हुआ है, जो वनस्पति के लिए जहरीला है। 'सेव अरावली' के ट्रस्टी कैलाश बिधुड़ी ने कहा कि पानी की गुणवत्ता के बारे में बार-बार की गई शिकायतों को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये पेड़, जिनमें से कुछ अनोखे थे और भारत और विदेश के विभिन्न हिस्सों से लाए गए थे, इस पानी के संपर्क में आने से खत्म हो गए।

भूजल प्रदूषण का डर

पास के बडखल गांव के निवासियों ने भूजल प्रदूषण की संभावना को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि संदिग्ध प्रदूषण के कारण उन्होंने पीने के लिए भूजल का इस्तेमाल बंद कर दिया है, जिसके बारे में उनका मानना है कि यह झील में ट्रीटेड सीवेज वॉटर भरने के बाद शुरू हुआ। पर्यावरण पत्रकार चंद्रकांत यादव ने इस मामले को हरियाणा के वन और पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह तक पहुंचाया है, जिन्होंने गहन जांच का वादा किया है।

आधिकारिक जवाब और विशेषज्ञों की राय

फरीदाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड के एक कार्यकारी अभियंता संजीव ने प्रोजेक्ट का बचाव करते हुए कहा कि छोड़े गए पानी सभी निर्धारित मानदंडों को पूरा करता है और लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि पानी का रंग जलकुंभी के कारण हो सकता है, और झील में कचरा फेंकने व नहाने से भी पानी की गुणवत्ता खराब हो सकती है। हालांकि, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की सुष्मिता सेनगुप्ता सहित जल विशेषज्ञों ने नोट किया कि पानी का रंग और झाग अपर्याप्त उपचार का संकेत देते हैं। उन्होंने स्वतंत्र मूल्यांकन की आवश्यकता पर जोर दिया और ऊंचे कुल घुलित ठोस (high total dissolved solids) और संभावित औद्योगिक रासायनिक दूषित पदार्थों से संबंधित जोखिमों को उजागर किया, खासकर जब ट्रीटेड अपशिष्ट जल का उपयोग सख्त निगरानी और सुरक्षा उपायों के बिना रिचार्ज के लिए किया जाता है।

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