Sal Borer Outbreak: मध्य प्रदेश के जंगलों पर संकट, **1.56 लाख** से ज्यादा पेड़ काटे जाएंगे

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Sal Borer Outbreak: मध्य प्रदेश के जंगलों पर संकट, **1.56 लाख** से ज्यादा पेड़ काटे जाएंगे

मध्य प्रदेश के जंगलों में 'साल हार्टवुड बोरर' (Sal heartwood borer) के भीषण प्रकोप के कारण प्रशासन ने **1,56,319** पेड़ों को काटने का फैसला लिया है। यह सफाई अभियान मार्च **2027** तक जारी रहेगा, जिससे स्थानीय जैव-विविधता और वन-आश्रित समुदायों की आजीविका पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

मध्य प्रदेश के डिंडौरी और अनूपपुर जिलों में 'साल हार्टवुड बोरर' का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। सतपुड़ा-मैकाल के संवेदनशील इलाकों को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने 1,56,319 संक्रमित साल के पेड़ों को हटाने की अनुमति दी है। यह ऑपरेशन सितंबर 2026 के अंत में शुरू हुआ था और इसका मुख्य लक्ष्य कीड़ों के प्रजनन चक्र को तोड़ना है।

बड़े पैमाने पर कटाई और रणनीति

प्रशासन ने डिंडौरी जिले में 1,46,784 और अनूपपुर के अमरकंटक क्षेत्र में 9,535 पेड़ों को काटने का लक्ष्य रखा है। विभाग 'ट्रैप ट्री' (Trap Tree) तकनीक का भी इस्तेमाल कर रहा है। कीटों को पकड़ने के लिए स्थानीय लोगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसमें प्रति कीड़ा ₹2 का भुगतान किया जा रहा है। अब तक 19 लाख से ज्यादा कीड़े पकड़े जा चुके हैं।

आर्थिक और पारिस्थितिक जोखिम

इस संकट का सीधा असर उन आदिवासी समुदायों पर पड़ा है जो साल के बीजों, पत्तों और औषधीय पौधों पर निर्भर हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों को चिंता है कि हजारों पेड़ों की कटाई से नर्मदा और सोन नदी के वाटरशेड क्षेत्र में मिट्टी के कटाव और जल संतुलन बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है।

आगे क्या होगा?

मार्च 2027 की समय सीमा को देखते हुए, सबसे बड़ी चुनौती यह है कि क्या यह विनाशकारी कदम जंगल को बचाने में सफल होगा या पारिस्थितिकी तंत्र को और नुकसान पहुंचाएगा। अब नजरें इस पर टिकी हैं कि सरकार प्रभावित समुदायों के पुनर्वास और वनीकरण की योजना को कैसे लागू करती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.