पंजाब में 2 नवंबर 2026 तक पराली जलाने की **1,612** घटनाएं सामने आई हैं, जबकि राज्य में **77%** से अधिक धान की कटाई पूरी हो चुकी है। प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए **423 FIR** दर्ज की हैं और **₹29.15 लाख** का जुर्माना लगाया है।
सरकारी सख्ती और कार्रवाई
उत्तर भारत में बढ़ते प्रदूषण के बीच पंजाब सरकार ने पराली जलाने के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। 2 नवंबर 2026 तक राज्य में पराली जलाने की कुल 1,612 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इस बढ़ते संकट को रोकने के लिए सरकार ने न केवल आर्थिक दंड लगाया है, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी सख्त कदम उठाए हैं। अब तक कुल ₹29.15 लाख का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से करीब ₹19 लाख की वसूली की जा चुकी है। इसके अलावा, 472 संपत्तियों के लैंड रेवेन्यू रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' की गई है, जो भविष्य के लिए एक बड़ा संकेत है।
प्रमुख हॉटस्पॉट और चुनौतियां
जमीनी स्तर पर की गई जांच में 1,380 स्थानों में से 663 जगहों पर पराली जलाए जाने की पुष्टि हुई है। सबसे अधिक चिंताजनक स्थिति तरनतारन (Tarn Taran) की है, जहां अकेले 489 घटनाएं दर्ज की गई हैं। फिरोजपुर और अमृतसर में भी मामलों में तेजी देखी जा रही है। वर्तमान में राज्य में 77.38% धान की कटाई पूरी हो चुकी है। किसानों पर गेहूं की बुवाई के लिए जल्द से जल्द खेत खाली करने का दबाव है, जो इस समस्या का मुख्य कारण बना हुआ है।
आर्थिक और प्रशासनिक प्रभाव
यह संकट न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि कृषि क्षेत्र की उत्पादकता के लिए भी एक चुनौती है। पराली का सही प्रबंधन न हो पाने के कारण प्रशासन और किसानों के बीच खींचतान बनी हुई है। बेहतर मशीनरी की कमी और बुवाई की सीमित समय-सीमा (sowing window) के कारण परिचालन संबंधी दिक्कतें आ रही हैं। Punjab Pollution Control Board (PPCB) लगातार फील्ड गतिविधियों की निगरानी कर रहा है, क्योंकि खराब हवा का असर सीधे तौर पर क्षेत्रीय व्यापार और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, जिससे औद्योगिक कामकाज में भी बाधा आने का जोखिम बना हुआ है।
