पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। 15 सितंबर से 5 नवंबर के बीच **2,787** मामले दर्ज किए गए हैं, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए **710** FIR दर्ज की हैं और **₹24 लाख** से ज्यादा का जुर्माना वसूला है।
सख्त प्रशासनिक कार्रवाई
प्रशासनिक दबाव लगातार बढ़ रहा है क्योंकि धान की कटाई के दौरान खेतों में आग लगाने की घटनाएं पीक पर होती हैं। पंजाब सरकार ने उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत कानूनी कार्यवाही शुरू की है। जुर्माने की बात करें तो प्रशासन ने ₹46 लाख से अधिक का पर्यावरण मुआवजा लगाया है, जिसमें से ₹24 लाख की वसूली भी की जा चुकी है।
सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में तरनतारन शीर्ष पर है, जहां 586 आग की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इसके बाद फिरोजपुर का नंबर आता है। अकेले तरनतारन में 294 FIR दर्ज की गई हैं, जो इस समस्या से निपटने के लिए प्रशासन की आक्रामक रणनीति को दर्शाती हैं।
आर्थिक और रेगुलेटरी प्रभाव
व्यापक अर्थव्यवस्था के नजरिए से देखें, तो पराली की आग एक बड़ा रेगुलेटरी और ऑपरेशनल रिस्क बनी हुई है। हर साल दिल्ली-NCR और आसपास के इलाकों में बिगड़ती एयर क्वालिटी के कारण सरकार निर्माण कार्यों, ट्रकिंग और औद्योगिक गतिविधियों पर सख्त पाबंदियां लगा देती है। ये प्रतिबंध सप्लाई चेन और औद्योगिक उत्पादन को सीधे प्रभावित करते हैं।
CAQM (Commission for Air Quality Management) वर्तमान में 12 सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में अनुपालन की समीक्षा कर रहा है। गेहूं की बुवाई का मौसम करीब है, ऐसे में प्रशासन पर आग की घटनाओं को रोकने का दबाव और बढ़ने वाला है। इन्वेस्टर्स के लिए यह जरूरी है कि वे दिल्ली-NCR बेल्ट में होने वाली सरकारी सख्ती और उसके इंडस्ट्रियल आउटपुट पर असर को बारीकी से मॉनिटर करें।
