पॉलीसाइकिल ने अपने सीरीज़ ए फंडिंग राउंड में ₹26 करोड़ (लगभग $2.8 मिलियन) सुरक्षित किए हैं, जिसमें रेनमैटर, ज़ीरोधा का निवेश आर्म, ने नेतृत्व किया है। यह वित्तीय निवेश भारत की व्यापक प्लास्टिक कचरा समस्या से निपटने में एक महत्वपूर्ण कदम, केमिकल रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी स्टैक का विस्तार करने के लिए है।
नई पूंजी का रणनीतिक रूप से औद्योगिक भागीदारों के साथ सहयोग में वाणिज्यिक परियोजनाओं (commercial projects) को लॉन्च करने के लिए उपयोग किया जाएगा। पॉलीसाइकिल अपनी इंजीनियरिंग और संचालन टीमों (engineering and operations teams) को मजबूत करने और घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लाइसेंसिंग प्रयासों (licensing efforts) का समर्थन करने की भी योजना बना रहा है। पेट्रोकेमिकल और डाउनस्ट्रीम विनिर्माण भागीदारों (petrochemical and downstream manufacturing partners) के साथ आगे जुड़ाव भी एक प्रमुख उद्देश्य है।
2016 में अमित टंडन द्वारा स्थापित पॉलीसाइकिल की मुख्य तकनीक विभिन्न प्लास्टिक कचरे की धाराओं, जैसे निम्न-श्रेणी और दूषित सामग्री (low-grade and contaminated materials) - जैसे सिंगल-यूज पॉलीथीन बैग्स और मिक्स्ड पॉलीओलेफिन पैकेजिंग (mixed polyolefin packaging) - को हाइड्रोकार्बन तेलों में (hydrocarbon oils) परिवर्तित करती है। इन तेलों का उपयोग कंपनियों द्वारा वर्जिन प्लास्टिक और अन्य सामग्री का उत्पादन करने के लिए किया जा सकता है, जो एक चक्रीय समाधान (circular solution) प्रदान करता है जहाँ पारंपरिक यांत्रिक रीसाइक्लिंग विधियाँ (mechanical recycling methods) विफल हो जाती हैं।
भारत एक महत्वपूर्ण प्लास्टिक कचरा चुनौती का सामना कर रहा है, जो सालाना लगभग 9.3 मिलियन टन कचरा उत्पन्न करता है, जो वैश्विक कचरे का एक बड़ा हिस्सा है। इसमें एक बड़ा हिस्सा मल्टी-लेयर्ड प्लास्टिक (multi-layered plastics) - जैसे खाद्य रैपर और पाउच - का होता है, जिन्हें रीसायकल करना बेहद मुश्किल है। पारंपरिक विधियाँ ऐसी सामग्रियों का 1% से भी कम रीसायकल करती हैं, जिनमें से अधिकांश लैंडफिल या भस्मीकरण (incineration) के लिए नियत होती है, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य जोखिम पैदा होते हैं, खासकर अनौपचारिक कचरा बीनने वालों (informal waste pickers) के लिए।
पॉलीसाइकिल की प्रणाली एक पूरी तरह से निरंतर प्रक्रिया (fully continuous process) है जो प्रति मॉड्यूल प्रतिदिन 100 टन तक प्लास्टिक कचरे को संभाल सकती है। कंपनी का दावा है कि उसकी तकनीक ने "टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल 7" (TRL 7) हासिल कर लिया है, जो विस्तारित औद्योगिक संचालन (extended industrial operations) में सफल परीक्षण और वाणिज्यिक स्तर पर विस्तार (commercial scale-up) के लिए तत्परता दर्शाता है। यह उन्नत चरण महत्वपूर्ण है क्योंकि केमिकल रीसाइक्लिंग उच्च रीसाइक्लिंग दरों (higher recycling rates) और सामग्री की चक्रीयता (material circularity) के लिए नियामक दबावों के बीच कर्षण प्राप्त कर रहा है, हालांकि यह क्षेत्र अपनी पूंजी-गहनता (capital intensity) और तकनीकी जटिलता (technical complexity) के लिए जाना जाता है।
पॉलीसाइकिल को एडवांस्ड प्लास्टिक रीसाइक्लिंग टेक के लिए ₹26 करोड़ मिले
ENVIRONMENT
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बेंगलुरु स्थित पॉलीसाइकिल ने रेनमैटर, जीरोधा के निवेश आर्म, के नेतृत्व वाले सीरीज़ ए फंडिंग राउंड में ₹26 करोड़ जुटाए हैं। यह पूंजी उन प्लास्टिक कचरे को हाइड्रोकार्बन तेलों में बदलने वाली केमिकल रीसाइक्लिंग तकनीक को बढ़ाने में मदद करेगी, जिन्हें रीसायकल करना मुश्किल है। इस पहल का उद्देश्य भारत की गंभीर प्लास्टिक कचरा समस्या का समाधान करना है, जहाँ सालाना लाखों टन कचरा लैंडफिल में पहुँच जाता है।
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