PadCare Labs को मिला ₹25 करोड़ का फंड! भारत के 'वेस्ट रूल्स' बने कंपनी की मजबूती

ENVIRONMENT
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
PadCare Labs को मिला ₹25 करोड़ का फंड! भारत के 'वेस्ट रूल्स' बने कंपनी की मजबूती
Overview

सैनिटरी वेस्ट रीसाइक्लिंग में काम करने वाली भारतीय कंपनी PadCare Labs ने एक बड़ी फंडिंग हासिल की है। कंपनी ने प्री-सीरीज़ ए राउंड में **$3 मिलियन** (लगभग **₹25 करोड़**) जुटाए हैं, जिसका नेतृत्व Rainmatter by Zerodha ने किया। इस फंड का इस्तेमाल कंपनी अपनी रीसाइक्लिंग क्षमता बढ़ाने और एक नया ऐप लॉन्च करने में करेगी।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

'कचरा नियमों' का बड़ा बूस्ट

PadCare Labs की यह फंडिंग सिर्फ कंपनी के लिए ही नहीं, बल्कि भारत के उभरते क्लीनटेक सेक्टर के लिए भी एक बड़ा संकेत है। इसकी मुख्य वजह देश में लगातार सख्त होते जा रहे वेस्ट मैनेजमेंट के नियम हैं। 2026 में लागू होने वाले नए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (SWM) रूल्स, 2016 के नियमों की जगह लेंगे और कचरे को विकेन्द्रीकृत (decentralized) तरीके से मैनेज करने, लैंडफिल पर निर्भरता कम करने और बड़े पैमाने पर कचरा पैदा करने वालों (Bulk Waste Generators) पर ज़्यादा जवाबदेही तय करेंगे। इन नियमों में सैनिटरी वेस्ट (जैसे डायपर और पैड) को अलग करने और रीसायकल करने पर खास जोर दिया गया है, जिसने PadCare जैसी स्पेशलाइज्ड कंपनियों के लिए एक बड़ा और अनिवार्य मार्केट खोल दिया है।

डायपर वेस्ट का समाधान, 'PadCare Orbit' का लॉन्च

PadCare Labs सैनिटरी वेस्ट, खासकर बच्चों के डायपर और महिलाओं के सैनिटरी पैड से जुड़े कचरे को रीसायकल करने की अनोखी पेटेंटेड तकनीक पर काम करती है। भारत में हर साल 12 अरब से ज़्यादा डिस्पोजेबल डायपर इस्तेमाल होते हैं, जो कुल नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरे का 10% से ज़्यादा हिस्सा होते हैं। PadCare की तकनीक इस कचरे से प्लास्टिक और सेल्युलोज पल्प को अलग करती है, जिन्हें बाद में उद्योगों में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके 'Rebirth' प्रोडक्ट लाइन के तहत, कंपनी रीसाइकल मटेरियल से कॉर्पोरेट स्टेशनरी जैसे प्रोडक्ट भी बनाती है। इस फंडिंग से कंपनी अपनी रीसाइक्लिंग क्षमता को 2027 तक बढ़ाकर 2,000 मेट्रिक टन सालाना करने की योजना बना रही है। साथ ही, कंपनी अपना ऐप-आधारित सॉल्यूशन 'PadCare Orbit' भी लॉन्च करेगी।

निवेशकों का भरोसा: मुनाफे और ग्रोथ की कहानी

इस प्री-सीरीज़ ए राउंड में Rainmatter, 3one4 Capital, Brigade REAP जैसे प्रमुख निवेशकों के अलावा EXIM Bank और ICICI Bank ने भी डेब्‍ट फाइनेंसिंग के ज़रिए पैसा लगाया है। निवेशकों का भरोसा कंपनी के दमदार फाइनेंशियल परफॉरमेंस पर टिका है। PadCare Labs लगातार दो फाइनेंशियल ईयर से PAT पॉजिटिव (Profit After Tax) है और 26% का EBITDA मार्जिन हासिल कर रही है। कंपनी ने 136% का CAGR (Compound Annual Growth Rate) दर्ज किया है और उसका क्लाइंट रिटेंशन रेट 99.5% है। निवेशक इसे सिर्फ एक सस्टेनेबिलिटी प्ले नहीं, बल्कि लॉन्ग-टर्म अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा मान रहे हैं।

विस्तार और आगे की राह

PadCare Labs बेंगलुरु और दिल्ली NCR जैसे शहरों में अपना विस्तार करेगी और 2027 तक APAC मार्केट्स को भी टारगेट करने का लक्ष्य रखती है। हालांकि, डायपर जैसी जटिल सामग्री को इकोनॉमिकली वायबल तरीके से रीसायकल करने के लिए R&D और ऑपरेशनल रिफाइनमेंट की ज़रूरत होगी। इसके अलावा, भारत में सोर्स सेग्रीगेशन (कचरा अलग करने) की चुनौती और लोगों को इस प्रक्रिया के बारे में जागरूक करना भी कंपनी के लिए महत्वपूर्ण होगा।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.