ओडिशा में बाढ़ का कहर: हीराकुड बांध से पानी छोड़े जाने से 7 लाख लोग प्रभावित

ENVIRONMENT
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
ओडिशा में बाढ़ का कहर: हीराकुड बांध से पानी छोड़े जाने से 7 लाख लोग प्रभावित

हीराकुड बांध से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण महानदी नदी उफान पर है, जिससे ओडिशा के 20 जिलों में लगभग 7 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। बांध के जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों ने 14 गेट खोल दिए हैं, क्योंकि यह 630 फुट की क्षमता के करीब पहुंच रहा है।

महानदी में बाढ़ का तांडव, 7 लाख लोग मुश्किल में

ओडिशा इस वक्त भयानक बाढ़ की चपेट में है। महानदी नदी में पानी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिसकी वजह हीराकुड बांध से छोड़ा गया भारी पानी है। छत्तीसगढ़ के ऊपरी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश के कारण बांध का जलस्तर 623.52 फुट तक पहुंच गया था। बांध की अधिकतम क्षमता 630 फुट है, ऐसे में बांध को सुरक्षित रखने के लिए करीब 3,69,322 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।

फसलों और बुनियादी ढांचे पर भारी असर

बाढ़ का पानी ओडिशा के 20 जिलों, जिनमें कटक, पुरी, खुर्दा और जगतसिंहपुर जैसे इलाके शामिल हैं, के निचले इलाकों में घुस गया है। महानदी की सहायक नदियां, जैसे लूना, दया और भार्गवी भी उफान पर हैं, जिससे तटबंध टूट रहे हैं और बाढ़ का दायरा और बढ़ गया है। इसका सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। ये इलाके कृषि के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं और खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद होने का खतरा मंडरा रहा है। फिलहाल 1.90 लाख लोगों को सुरक्षित 520 राहत केंद्रों में पहुंचाया गया है, लेकिन पानी उतरने के बाद ही पता चलेगा कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे और स्थानीय व्यवसायों पर इसका कितना लंबा असर पड़ेगा।

राहत और बचाव कार्य जारी

राज्य सरकार ने हालात से निपटने के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF), ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ODRAF) और राज्य अग्निशमन सेवाओं की 136 बचाव टीमों को तैनात किया है। प्रभावित जिलों में सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं और बैराज जैसी महत्वपूर्ण जगहों पर आवाजाही प्रतिबंधित कर दी गई है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मुंडाली बैराज पर 36 घंटे के भीतर 8 लाख क्यूसेक से अधिक पानी सुरक्षित रूप से निकालना है, ताकि निचले इलाकों में जान-माल का नुकसान न हो। हालांकि पिछले 24 घंटों में बारिश रुकी हुई है, लेकिन बांध से पानी छोड़ा जाना अभी भी निचले डेल्टा क्षेत्र में जलस्तर को प्रभावित कर रहा है।

निवेशकों और उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों पर नजर रखते हैं, पानी के घटने की गति और उसके बाद बुनियादी ढांचे व फसलों के नुकसान का आकलन महत्वपूर्ण होगा। कटक और आसपास के जिलों में कानून व्यवस्था बनाए रखने और आवश्यक सेवाएं बहाल करने की राज्य की क्षमता, साथ ही परिवहन और लॉजिस्टिक्स को फिर से चालू करना, अगली महत्वपूर्ण खबरें होंगी। ढबलेश्वर शिव मंदिर और अन्य स्थानीय सुविधाओं के बंद रहने की अवधि यह बताएगी कि सामान्य व्यावसायिक और पर्यटन गतिविधियां कब तक बाधित रह सकती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.