चीतों के शिकार को लेकर नया अध्ययन: क्या मौजूदा कोटे टिकाऊ हैं?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
चीतों के शिकार को लेकर नया अध्ययन: क्या मौजूदा कोटे टिकाऊ हैं?

एक नए अध्ययन से पता चला है कि उप-सहारा अफ्रीका में चीतों की आबादी 176,000 तक पहुंच सकती है, जो वर्तमान संख्या से कहीं ज़्यादा है। लेकिन, शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि शिकार के मौजूदा कोटे अक्सर टिकाऊ स्तर से ज़्यादा हैं, जिससे इनकी आबादी में और कमी का खतरा है।

चीतों की आबादी का सच

Nottingham Trent University के एक नए शोध में पता चला है कि उप-सहारा अफ्रीका में चीतों की आबादी एक नाजुक मोड़ पर है। जहाँ अभी इनकी संख्या 45,000 से 176,000 के बीच अनुमानित है, वहीं शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर सही संरक्षण रणनीतियों को अपनाया जाए तो यह इलाका 176,000 चीतों का समर्थन कर सकता है। इस शोध से सरकारों और संरक्षण समूहों को यह समझने में मदद मिलेगी कि किन इलाकों में हैबिटैट (habitat) सुरक्षा और शिकार की आबादी बढ़ाने के प्रयासों की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।

ट्रॉफी हंटिंग (Trophy Hunting) प्रबंधन की चुनौतियाँ

इस स्टडी का एक बड़ा हिस्सा ट्रॉफी हंटिंग के प्रभाव पर केंद्रित है, जो वन्यजीव प्रबंधन में एक विवादास्पद मुद्दा बना हुआ है। शोध में यह बात सामने आई है कि जिन अफ्रीकी देशों में चीतों के शिकार की अनुमति है, उनमें से आधे से ज़्यादा देशों में, शिकार के मौजूदा कोटे टिकाऊ स्तर से ज़्यादा प्रतीत होते हैं। इस अंतर का मुख्य कारण इन कोटे को तय करते समय पुरानी या ज़रूरत से ज़्यादा अनुमानित आबादी के आंकड़ों का इस्तेमाल करना है। स्टडी में शामिल वैज्ञानिक इस बात पर ज़ोर देते हैं कि ऐसे गलत आंकड़ों पर निर्भर रहने से ज़रूरत से ज़्यादा शिकार हो सकता है, जो सुरक्षित इलाकों के बाहर चीतों की आबादी में सीधी गिरावट का कारण बन सकता है।

संरक्षण के लिए रणनीतिक प्राथमिकताएं

शोधकर्ताओं ने बताया है कि संरक्षित ज़ोन के मुकाबले उन इलाकों में चीतों की आबादी का घनत्व ज़्यादा है जहाँ इंसानी गतिविधियाँ ज़्यादा हैं, जैसे खेती या पशुपालन। आबादी में हो रही कमी को रोकने के लिए, यह स्टडी ज़्यादा कठोर, आंकड़ों पर आधारित प्रबंधन की ओर बढ़ने का सुझाव देती है। इसमें उन इलाकों में कैमरा ट्रैपिंग (camera trapping) और हैबिटैट (habitat) को फिर से ठीक करने को प्राथमिकता देना शामिल है, जहाँ चीतों की मौजूदगी का संदेह है लेकिन पूरी तरह से दस्तावेज़ीकरण नहीं हुआ है, खासकर पश्चिमी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में।

इन खास इलाकों में संसाधन लगाकर, संरक्षणवादी उन चीतों के जीवित रहने की संभावनाओं को बेहतर बनाने की उम्मीद कर रहे हैं जो राष्ट्रीय उद्यानों की सुरक्षा के बाहर रहते हैं। यह स्टडी शिकार के मौजूदा कोटे की तत्काल और व्यापक समीक्षा की मांग करती है, और राष्ट्रीय सरकारों से आग्रह करती है कि वे अपने निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में वास्तविक समय के फील्ड सर्वे के आंकड़ों को शामिल करें। जैसे-जैसे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय जैव विविधता (biodiversity) पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित कर रहा है, इन देशों की आर्थिक गतिविधियों को दीर्घकालिक पारिस्थितिक स्थिरता के साथ संतुलित करने की क्षमता आने वाले वर्षों में पर्यावरण नीति और वन्यजीव प्रबंधन के लिए एक प्रमुख निगरानी बिंदु होगी।

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