कीड़ों की प्रजातियां: धरती पर 2 करोड़ से ज़्यादा, पर घट रही संख्या!

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AuthorMehul Desai|Published at:
कीड़ों की प्रजातियां: धरती पर 2 करोड़ से ज़्यादा, पर घट रही संख्या!

एक नई वैज्ञानिक स्टडी ने धरती पर कीड़ों की प्रजातियों की संख्या का अनुमान काफी बढ़ा दिया है। स्टडी के मुताबिक, दुनिया भर में कीड़ों की 2 करोड़ से ज़्यादा प्रजातियां हो सकती हैं। यह आंकड़ा पहले के अनुमानों से कहीं ज़्यादा है, लेकिन चिंता की बात यह है कि इंसानी गतिविधियों के कारण इनकी आबादी तेजी से घट रही है, जिससे संरक्षण की तत्काल आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया है।

कीड़ों की दुनिया: एक बड़ा खुलासा

हाल ही में 'साइंस' जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, पृथ्वी पर कीड़ों की प्रजातियों की संख्या 1.42 करोड़ से लेकर 2.03 करोड़ के बीच हो सकती है। यह संख्या पहले माने जाने वाले 60 लाख के अनुमान से काफी ज़्यादा है। वैज्ञानिकों ने अब तक लगभग 12 लाख प्रजातियों को ही आधिकारिक तौर पर पहचाना है, जिसका मतलब है कि कीड़ों की एक बहुत बड़ी आबादी अभी भी हमारी जानकारी से बाहर है।

कोस्टा रिका में रिसर्च के तरीके

इस स्टडी के लिए शोधकर्ताओं ने कोस्टा रिका के 'एरिया डी कंज़र्वेशन गुआनाकास्टे (ACG)' में गहन रिसर्च की। इस संरक्षित क्षेत्र में सूखे, बादल वाले और वर्षावन जैसे विविध वातावरण मौजूद हैं। शोधकर्ताओं ने उड़ने वाले कीड़ों को पकड़ने के लिए विशेष 'मलाइज़ ट्रैप' का इस्तेमाल किया। इस प्रक्रिया से लगभग 16.3 लाख उष्णकटिबंधीय कीड़े एकत्र किए गए। 'डीएनए बार्कोडिंग' तकनीक का उपयोग करके, जिससे प्रजातियों के विशिष्ट डीएनए क्रम का पता लगाया जाता है, शोधकर्ताओं ने अकेले इस रिजर्व के मुख्य क्षेत्र से 53,945 कीड़ों की प्रजातियों की पहचान की।

टीम ने खास तौर पर 'माइक्रोगैस्ट्रिने' (Microgastrinae) पर ध्यान केंद्रित किया, जो परजीवी ततैया का एक समूह है और इल्लियों (caterpillars) के साथ मिलकर काम करते हैं। इन ततैया का अध्ययन करके और रिजर्व में पेड़ों की प्रजातियों की विविधता के आधार पर डेटा का विश्लेषण करके, शोधकर्ताओं ने कीड़ों की वैश्विक आबादी का नया अनुमान तैयार किया। यह तरीका बायोडायवर्सिटी (जैव विविधता) को मापने के पारंपरिक तरीकों से हटकर, अच्छी तरह से अध्ययन किए गए क्षेत्रीय डेटा पर आधारित सांख्यिकीय मॉडलिंग की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है।

संरक्षण की चुनौतियां और आर्थिक असर

यह रिसर्च जहां दुनिया की जैव विविधता की समृद्धि को उजागर करती है, वहीं इन प्रजातियों के भविष्य के लिए एक गंभीर चेतावनी भी देती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि आवासों का विनाश, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी मानव-जनित गतिविधियों के कारण कीड़ों की आबादी वर्तमान में अभूतपूर्व गिरावट का सामना कर रही है।

निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए, यह डेटा 'पर्यावरण, सामाजिक और शासन' (ESG) रिपोर्टिंग के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में बायोडायवर्सिटी संरक्षण के बढ़ते महत्व को रेखांकित करता है। जैसे-जैसे पर्यावरणीय गिरावट के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ रही है, कृषि, रासायनिक निर्माण और भूमि विकास से जुड़ी कंपनियों को पारिस्थितिक तंत्र पर अपने प्रभाव के संबंध में बढ़ती जांच का सामना करना पड़ रहा है। कीड़ों की जैव विविधता का नुकसान केवल एक पर्यावरणीय चिंता नहीं है, बल्कि वैश्विक खाद्य प्रणालियों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक जोखिम भी पैदा करता है, क्योंकि कीड़े परागण, कीट नियंत्रण और मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं। भविष्य में इन निष्कर्षों से पर्यावरण नियमों को कैसे प्रभावित किया जाता है और क्या वैश्विक संरक्षण रणनीतियों को इन विशाल जैव विविधता अनुमानों को दर्शाने के लिए अद्यतन किया जाएगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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