Nepal Floods: कुदरत का कहर, 1,365 लोगों की मौत और **200 अरब नेपाली रुपये** से ज्यादा का नुकसान

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Nepal Floods: कुदरत का कहर, 1,365 लोगों की मौत और **200 अरब नेपाली रुपये** से ज्यादा का नुकसान

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और एवलांच ने भारी तबाही मचाई है। आपदा में **1,365** लोगों की जान जा चुकी है और **5,326** लोग अभी भी लापता हैं। इस त्रासदी से देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को **200 अरब नेपाली रुपये** से ज्यादा का नुकसान हुआ है।

बीते 26 अगस्त को उत्तरी और मध्य नेपाल में आई फ्लैश फ्लड और आइस-रॉक एवलांच ने एक गहरा मानवीय और आर्थिक संकट पैदा कर दिया है। 9 सितंबर, 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, मरने वालों की संख्या 1,365 तक पहुंच गई है, जबकि 5,326 लोग अभी भी लापता हैं। दुर्गम इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, जबकि हजारों परिवारों ने अपने घर और जरूरी सुविधाएं खो दी हैं।

आर्थिक मोर्चे पर बड़ा झटका

आर्थिक नुकसान के अनुमानों ने सबको हैरान कर दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इंफ्रास्ट्रक्चर को हुआ नुकसान 200 अरब नेपाली रुपये के पार निकल गया है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में आई बाढ़ के प्रचंड वेग ने सड़कों, पुलों और बिजली केंद्रों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। कनेक्टिविटी खत्म होने से स्थानीय सप्लाई चेन और ट्रेड रूट्स पर भी बुरा असर पड़ा है, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ना तय है।

हाइड्रोपावर सेक्टर तबाह

ऊर्जा क्षेत्र के लिए यह आपदा एक बड़ा झटका साबित हुई है। रसुवा और त्रिशूली क्षेत्रों में कम से कम 8 प्रमुख हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं, जबकि कई अन्य को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है। नेपाल की विकास गाथा में हाइड्रोपावर एक आधारशिला है, ऐसे में इन प्रोजेक्ट्स का नष्ट होना एक दीर्घकालिक आर्थिक setback है।

इस त्रासदी ने सीमा पार तिब्बत के इलाकों को भी प्रभावित किया है, जहां 43 लोगों की पुष्टि हो चुकी है और 500 से ज्यादा लोग लापता हैं। हिमालयी क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर की संवेदनशीलता को देखते हुए, अब रिकवरी और पुनर्निर्माण के लिए भारी निवेश की जरूरत होगी, जिसका असर आने वाले समय में क्षेत्रीय विकास परियोजनाओं पर दिख सकता है।

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