Ganga Floodplain Rules: NGT की निगरानी में Infrastructure प्रोजेक्ट्स, निवेशकों के लिए बढ़ी अनिश्चितता

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Ganga Floodplain Rules: NGT की निगरानी में Infrastructure प्रोजेक्ट्स, निवेशकों के लिए बढ़ी अनिश्चितता

National Green Tribunal (NGT) ने गंगा किनारे निर्माण के नए नियमों की समीक्षा शुरू कर दी है। सरकार ने 'कंस्ट्रक्शन-फ्री ज़ोन' को हटाकर अब तीन-स्तरीय ज़ोनिंग सिस्टम लागू किया है, जिससे रियल एस्टेट और इंफ्रा सेक्टर पर असर पड़ सकता है।

नियम में क्या बदला है?

अगस्त 2026 में जल शक्ति मंत्रालय ने गंगा नदी के किनारे निर्माण कार्यों को लेकर एक बड़ा बदलाव किया था। पुराने 'कंस्ट्रक्शन-फ्री ज़ोन' के बजाय अब तीन-स्तरीय सिस्टम लागू किया गया है। इसमें बाढ़ के प्रभाव के आधार पर 5 से 100 साल की अवधि के हिसाब से 'एक्टिव फ्लडप्लेन', 'रेगुलेटरी ज़ोन' और 'वॉर्निंग ज़ोन' बनाए गए हैं।

निवेशकों के लिए जोखिम

फिलहाल, NGT ने निर्माण कार्यों पर कोई स्टे (Stay) नहीं लगाया है, यानी काम जारी रह सकते हैं। लेकिन, पर्यावरण के जानकारों का कहना है कि यह नया सिस्टम पुराने सुरक्षा नियमों को कमजोर करता है। अगर NGT का फैसला सरकार के खिलाफ जाता है, तो प्रोजेक्ट्स में देरी हो सकती है और कंपनियों की लागत में 10% से 20% तक का इजाफा हो सकता है।

आगे क्या?

फिलहाल सभी की निगाहें 27 अक्टूबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर हैं। निवेशकों को सलाह है कि वे इंफ्रा और रियल एस्टेट सेक्टर के उन प्रोजेक्ट्स पर कड़ी नज़र रखें जो गंगा बेसिन के करीब स्थित हैं, क्योंकि कोर्ट का रुख ही भविष्य में इन कंपनियों के लिए रेगुलेटरी वातावरण तय करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.