NGT का सख्त आदेश: यमुना की सफाई और तेलंगाना में कूड़ा स्थलों का होगा कायाकल्प!

ENVIRONMENT
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
NGT का सख्त आदेश: यमुना की सफाई और तेलंगाना में कूड़ा स्थलों का होगा कायाकल्प!

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने दिल्ली, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में पर्यावरण से जुड़े कामों में तेजी लाने का आदेश दिया है। यमुना नदी की सफाई, तेलंगना के एक कूड़ा स्थल को ठीक करने और एक्वाकल्चर फार्मों के लिए सख्त रजिस्ट्रेशन लागू करने पर जोर दिया गया है।

Detailed Coverage

यमुना नदी और दिल्ली का कचरा प्रबंधन

NGT ने दिल्ली में यमुना नदी और इसके मुख्य नालों, जैसे कि साहिबी और शाहदरा, की पानी की गुणवत्ता की निगरानी में बड़ी कमियों को उजागर किया है। मई 2025 से अप्रैल 2026 के बीच 52 जगहों पर की गई निगरानी में पाया गया कि 33 जगहों पर ठोस कचरा फेंका जा रहा था। इसके चलते, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने नगर निगम दिल्ली और दिल्ली विकास प्राधिकरण को तत्काल कचरा हटाने का निर्देश दिया है।

इसके अलावा, NGT दिल्ली के भलस्वा, गाजीपुर और ओखला जैसे बड़े डंप साइटों पर जमा कचरे को हटाने का काम देख रहा है। बायोमाइनिंग का काम चल रहा है, लेकिन इन परियोजनाओं के पूरा होने की समय सीमा 2026 के अंत या 2027 तक है। इन साइटों को साफ करने में हो रही देरी से पर्यावरण संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं।

तेलंगाना में कचरा इंफ्रास्ट्रक्चर का कायाकल्प

NGT की दक्षिणी बेंच ने तेलंगना के मंछिरियाल में स्थित अंडालम्मा कॉलोनी डंपसाइट को पूरी तरह से साफ करने का आदेश दिया है, जो पिछले 20 सालों से चालू है। मंछिरियाल नगर निगम को अब वैज्ञानिक कचरा प्रसंस्करण लागू करना होगा, जिसमें 100% स्रोत पर कचरा अलग करना और एक ड्राई रिसोर्स कलेक्शन सेंटर की स्थापना शामिल है। आदेश में कचरे को खुले में जलाने पर भी रोक लगाई गई है और आग बुझाने के इंतजाम व गंध नियंत्रण प्रणाली लगाने की आवश्यकता बताई गई है। तेलंगना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रगति की निगरानी करेगा।

आंध्र प्रदेश में एक्वाकल्चर का अनुपालन

आंध्र प्रदेश में, ट्रिब्यूनल ने एक्वाकल्चर (मछली पालन) के पर्यावरणीय प्रभाव पर ध्यान केंद्रित किया है, खासकर गुटेनादेवी गांव में। अब मत्स्य विभाग और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी एक्वाकल्चर तालाबों का आधिकारिक रजिस्ट्रेशन हो। इस आदेश के तहत, कृषि भूमि को एक्वाकल्चर के लिए बदलने से पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य सिंचाई नहरों में खारे पानी के बहाव को रोकना और मिट्टी व पानी के स्वास्थ्य को होने वाले दीर्घकालिक नुकसान को कम करना है।

निवेशकों और हितधारकों के लिए, इन सुधार परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति और संबंधित अनुपालन लागत (compliance costs) पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। वैज्ञानिक कचरा प्रसंस्करण और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता के चलते आने वाली तिमाहियों में नगर निकायों और एक्वाकल्चर ऑपरेटरों को मशीनरी, कचरा प्रसंस्करण इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण निगरानी प्रणालियों पर खर्च बढ़ाना पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.