National Green Tribunal (NGT) ने पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर सख्त रुख अपनाते हुए Delhi Jal Board और भोपाल प्रशासन को कड़े निर्देश जारी किए हैं।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पर्यावरण संरक्षण के मोर्चे पर दो प्रमुख शहरों में सख्त कदम उठाए हैं। Delhi Jal Board (DJB) को ट्रिब्यूनल ने 4 हफ्ते का समय दिया है। इस दौरान उन्हें रेनवाटर हार्वेस्टिंग, ग्राउंडवाटर रिचार्ज और वॉटर क्वालिटी मॉनिटरिंग पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। ट्रिब्यूनल ने अगली सुनवाई के लिए 27 अक्टूबर, 2026 की तारीख तय की है, जहां बोर्ड के कामों की समीक्षा की जाएगी।
भोपाल में अतिक्रमण पर प्रहार
वहीं दूसरी ओर, NGT ने मध्य प्रदेश के भोपाल में स्थित Ramsar-लिस्टेड 'Bhoj Wetland' को बचाने का आदेश दिया है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वेटलैंड के बफर जोन और 50 से 250 मीटर के फुल टैंक लेवल (FTL) के भीतर मौजूद सभी अवैध निर्माणों को 3 महीने की डेडलाइन के भीतर हटा दिया जाए।
पानी के संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए 7 सदस्यों की एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने का भी आदेश दिया गया है। यह समिति Kerwa, Kaliasot और Bhoj वेटलैंड के लिए FTL को अंतिम रूप देगी ताकि भविष्य में अनधिकृत निर्माण पर रोक लगाई जा सके।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
ये निर्देश साफ दिखाते हैं कि सरकारी एजेंसियों पर अब पर्यावरणीय मानकों को पूरा करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। दिल्ली और भोपाल दोनों ही मामलों में असली चुनौती विभागों के बीच आपसी तालमेल की है। NGT के इन सख्त आदेशों का असर धरातल पर कितना दिखता है, यह आने वाले कुछ महीनों में साफ हो जाएगा।
