पश्चिमी विक्षोभ और डीप डिप्रेशन के चलते भारत में मॉनसून की गतिविधियां तेज हो गई हैं। ओडिशा, छत्तीसगढ़ और विदर्भ जैसे इलाकों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। देश के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी है, जिससे लॉजिस्टिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और खेती-किसानी पर असर पड़ सकता है।
ओडिशा से छत्तीसगढ़ तक रेड अलर्ट!
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने जानकारी दी है कि मॉनसून का सिस्टम और मजबूत हो गया है। एक डीप डिप्रेशन (Deep Depression) इस वक्त ओडिशा के उत्तरी अंदरूनी इलाकों पर बना हुआ है और झारखंड व छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ रहा है। इस वजह से मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश होने की आशंका है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजमर्रा के कामों के लिए खतरा पैदा कर सकती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और खेती पर कैसा असर?
ओडिशा, छत्तीसगढ़ और विदर्भ जैसे इलाकों में मौसम विभाग ने रेड अलर्ट (Red Alert) जारी किया है। कुछ जगहों पर 204.5 मिमी से भी ज्यादा बारिश हो सकती है। इतनी ज्यादा बारिश से जलजमाव और बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है, जिससे इन औद्योगिक और कृषि प्रधान क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स, माइनिंग और सड़क परिवहन में रुकावट आ सकती है। वहीं, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली-एनसीआर जैसे उत्तरी राज्यों में ऑरेंज अलर्ट (Orange Alert) जारी किया गया है, जहां भारी बारिश और तूफान की चेतावनी है। ऐसे मौसम में ट्रैफिक जाम होने और बिजली सप्लाई में दिक्कतें आने की आशंका बढ़ जाती है।
पहाड़ी राज्यों पर खतरा?
सक्रिय मॉनसून ट्रफ (Monsoon Trough) और पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के मेल से हिमालयी राज्यों में भी खतरा बढ़ गया है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में ऑरेंज अलर्ट है। शिमला, कुल्लू और नैनीताल जैसे जिलों में भूस्खलन (Landslides) और सड़कें बंद होने का खतरा है। इन इलाकों में पर्यटन और लॉजिस्टिक्स पर निर्भर व्यवसायों के लिए कनेक्टिविटी की समस्या और सप्लाई चेन में देरी हो सकती है।
तटीय इलाकों और खेती पर नजर
पश्चिम बंगाल, ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में समंदर में तेज लहरें उठ रही हैं। इसके चलते उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में मछुआरों को मछली पकड़ने से मना किया गया है। खेती-किसानी की बात करें तो खड़ी फसलों में जलजमाव सबसे बड़ी चिंता है। हालांकि, खरीफ की फसल के लिए मॉनसून जरूरी है, लेकिन बहुत ज्यादा और लगातार बारिश फसलों को खराब कर सकती है, जिसके लिए तेज हवाओं और मिट्टी में ज्यादा नमी से बचाव के उपाय करने होंगे।
निवेशकों को इस मौसम प्रणाली पर नजर रखनी चाहिए क्योंकि यह मध्य और उत्तरी भारत की ओर बढ़ रही है। अगले 24 से 48 घंटे यह तय करेंगे कि परिवहन, बिजली आपूर्ति और कृषि उत्पादन पर कितना असर पड़ेगा। स्थानीय अधिकारियों से मिलने वाली जानकारी पर नजर रखना जरूरी होगा।
