टेक दिग्गज Microsoft ने भारतीय स्टार्टअप Alt Carbon के साथ तीन साल का एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस डील के तहत Microsoft **37,000 टन** कार्बन रिमूवल क्रेडिट खरीदेगा। यह एशिया में 'एन्हांस्ड रॉक वेदरिंग' तकनीक पर Microsoft का पहला निवेश है, जो भारतीय क्लाइमेट-टेक फर्मों की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाता है।
क्या हुआ?
Microsoft ने बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप Alt Carbon के साथ तीन साल की पार्टनरशिप की है। इस समझौते के तहत Microsoft करीब 37,000 मीट्रिक टन कार्बन रिमूवल क्रेडिट खरीदेगा। यह एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि यह एशिया में 'एन्हांस्ड रॉक वेदरिंग' (enhanced rock weathering) तकनीक का उपयोग करके कार्बन रिमूवल क्रेडिट की Microsoft की पहली खरीद है। यह डील करीब एक साल की ड्यू डिलिजेंस और कॉन्ट्रैक्ट पर बातचीत के बाद हुई है, जिसमें Microsoft ने कार्बन रिमूवल के दावों की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए कड़ी निगरानी और वेरिफिकेशन की मांग की है।
तकनीक को समझें
Alt Carbon, जिसने 2023 में काम शुरू किया था, 'एन्हांस्ड रॉक वेदरिंग' नामक तकनीक का उपयोग करती है। इसमें मिनरल्स से भरपूर बेसाल्ट चट्टान को बारीक पाउडर में पीसकर खेती की जमीन पर फैलाया जाता है। जब यह चट्टान बारिश और मिट्टी के संपर्क में आती है, तो एक प्राकृतिक रासायनिक प्रक्रिया तेज हो जाती है। यह प्रक्रिया हवा से कार्बन डाइऑक्साइड को सोख लेती है और उसे स्थिर बाइकार्बोनेट में बदल देती है, जो मिट्टी में जमा हो जाता है।
इस काम के लिए, स्टार्टअप भारत के पूर्वी हिस्से में स्थित राजमहल ट्रैप्स से बेसाल्ट लेता है और इसे पश्चिम बंगाल के खेतों में फैलाता है। कंपनी पहले ही काफी बड़े पैमाने पर काम कर रही है, जिसमें 35,000 से अधिक किसानों के साथ लगभग 80,000 एकड़ जमीन पर काम शामिल है, जो चाय बागानों और धान की खेती वाले क्षेत्रों तक फैला हुआ है।
वैश्विक फर्में क्यों रुचि ले रही हैं?
बड़ी टेक कंपनियां अपने दीर्घकालिक जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कार्बन रिमूवल में तेजी से निवेश कर रही हैं। उच्च-गुणवत्ता वाले, सत्यापित कार्बन क्रेडिट की मार्केट में फिलहाल सप्लाई की कमी है। हालांकि कई कंपनियां कार्बन रिमूवल सेवाएं प्रदान करती हैं, लेकिन कुछ ही अपनी क्षमता को व्यावसायिक पैमाने पर साबित कर पाती हैं। Microsoft का यह कदम उन प्रदाताओं को प्राथमिकता देने का संकेत देता है जो अपने कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन (carbon sequestration) प्रभाव के विश्वसनीय, वैज्ञानिक सत्यापन का प्रदर्शन कर सकते हैं।
सेक्टर का संदर्भ
यह समझौता वैश्विक कार्बन मार्केट में एक बड़े बदलाव को दर्शाता है। भारत सहित ग्लोबल साउथ के सप्लायर्स प्रमुखता हासिल कर रहे हैं। 2022 में, इन क्षेत्रों के डेवलपर्स का कार्बन रिमूवल क्रेडिट में बहुत छोटा हिस्सा था, लेकिन हाल ही में यह हिस्सेदारी लगभग 26% तक बढ़ गई है।
शुरुआत में, अंतरराष्ट्रीय खरीदार उभरते बाजारों के कार्बन प्रोजेक्ट्स को लेकर सतर्क थे। हालांकि, अधिक कठोर सत्यापन मानकों के लागू होने और जारी किए जा रहे क्रेडिट की मात्रा में वृद्धि से वैश्विक खरीदारों का विश्वास बढ़ा है। Microsoft ने पहले भी बायोचार-आधारित कार्बन क्रेडिट के लिए Varaha जैसी भारतीय क्लाइमेट फर्मों के साथ काम किया है, जो भारत को क्लाइमेट-टेक इनोवेशन के हब के रूप में बढ़ती रुचि को दर्शाता है।
निवेशक क्या देखें?
क्लाइमेट-टेक और कार्बन क्रेडिट स्पेस पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए, कई कारक देखने लायक हैं। सबसे पहले, स्केलिंग और सत्यापन की चुनौती है। जैसे-जैसे कंपनियां सत्यापन योग्य परिणाम चाहती हैं, स्टार्टअप्स की कम लागत वाली और सटीक निगरानी, रिपोर्टिंग और सत्यापन (MRV) इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाए रखने की क्षमता एक प्रमुख अंतर होगी। निवेशक इस बात पर नजर रख सकते हैं कि क्या कंपनी कार्बन रिमूवल क्रेडिट की गुणवत्ता से समझौता किए बिना अधिक किसानों और विभिन्न प्रकार की फसलों तक अपनी पहुंच सफलतापूर्वक बढ़ा सकती है।
एक और दिलचस्प बात यह है कि इन क्रेडिट की दीर्घकालिक मांग क्या होगी। हालांकि Microsoft जैसी कंपनियों और Frontier जैसे प्रोक्योरमेंट ग्रुप्स (जिनमें Google, Stripe और Shopify जैसे सदस्य शामिल हैं) से मांग बनी हुई है, इस बाजार की स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या कार्बन रिमूवल की लागत अन्य उत्सर्जन-घटाने की रणनीतियों की तुलना में प्रतिस्पर्धी हो जाती है। अंत में, भारत में कार्बन क्रेडिट के लिए नियामक और प्रमाणन मानकों के विकास पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा, ताकि स्थानीय उद्योग के परिपक्व होने को देखा जा सके।
