लक्षद्वीप में मिला विशाल 'आलू' जैसा कोरल, 1800 साल पुराना!

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AuthorAditya Rao|Published at:
लक्षद्वीप में मिला विशाल 'आलू' जैसा कोरल, 1800 साल पुराना!
Overview

लक्षद्वीप के समुद्री वैज्ञानिकों ने कडमट द्वीप के पास 'पावना क्लैवस' (Pavona clavus) नाम के एक विशाल कोरल कॉलोनी का पता लगाया है, जिसका क्षेत्रफल लगभग **4,250 वर्ग मीटर** है। खास बात यह है कि इसके **58%** से ज्यादा ऊतक अभी भी सक्रिय हैं, जो इसे भारतीय महासागर की बढ़ती समुद्री हीटवेव के बीच कोरल के लचीलेपन को समझने के लिए एक अनमोल अवसर बनाता है।

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लचीलेपन का रहस्य

कडमट द्वीप के पास मिले इस "पोटैटो पैच" (Potato Patch) का दस्तावेज़ीकरण समुद्री जीव विज्ञान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह 4,250 वर्ग मीटर का 'पावना क्लैवस' कॉलोनी, तेजी से नष्ट हो रहे समुद्री जीवन के दौर में एक जैविक अजूबा है। हाल के दशकों में भारतीय महासागर में समुद्री हीटवेव की घटनाओं में चार गुना वृद्धि हुई है, लेकिन इस प्राचीन संरचना ने 58.47% जीवित ऊतक कवर बनाए रखा है। यह सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि यह समझने के लिए एक हाई-फिडेलिटी डेटा पॉइंट प्रदान करता है कि कोरल की विशिष्ट संरचनाएं लंबे समय तक चलने वाले थर्मल तनाव से कैसे बची रहती हैं।

तुलनात्मक जैविक संदर्भ

उथले पानी के कोरल, जो सतह पर गर्मी बढ़ने से तुरंत ब्लीच हो जाते हैं, उनके विपरीत यह कडमट कॉलोनी 5.2 मीटर से लेकर 20 मीटर की गहराई में स्थित है। यह गहराई इसे एक थर्मल बफर (thermal buffer) प्रदान करती है, जो सतह की अत्यधिक गर्मी से इसे बचाती है जिसने भारत के कई अन्य रीफ (reefs) को तबाह कर दिया है। जहाँ 2024 में सोलोमन आइलैंड्स में मिले रिकॉर्ड-तोड़ विशाल कोरल कॉलोनी ने दुनिया का ध्यान खींचा था, वहीं लक्षद्वीप की यह खोज 700 से 1,800 साल की अनुमानित आयु के कारण विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह बताता है कि शायद इस द्वीपसमूह के गहरे समुद्री तटों पर ऐसे "रेफ्यूजिया" (refugia) - यानी गहरे पानी के क्षेत्र - छिपे हो सकते हैं, जो जलवायु परिवर्तन से प्रभावित वैश्विक समुद्री जैव विविधता को अपेक्षाकृत सुरक्षित रखते हैं।

संरचनात्मक भेद्यता

इस खोज से उत्साहित होने के बावजूद, लक्षद्वीप द्वीपसमूह का व्यापक पर्यावरणीय परिदृश्य चिंताजनक बना हुआ है। हालिया शोध बताते हैं कि भारत के कुछ कोरल क्षेत्रों में 85% तक कोरल कवर पिछले ब्लीचिंग (bleaching) की घटनाओं में नष्ट हो चुका है। इसके अलावा, यह पारिस्थितिकी तंत्र वर्तमान में तलछट (sediment) और पानी दोनों में माइक्रोप्लास्टिक (microplastics) की उच्च सांद्रता से जूझ रहा है, खासकर बसे हुए एटोल (atolls) के आसपास। "पोटैटो पैच" की संरचनात्मक अखंडता भी आसपास के समुद्री वातावरण से जुड़ी हुई है; तलछट या तटीय अपवाह (coastal runoff) में कोई भी स्थानीय वृद्धि कॉलोनी की सदियों पुरानी विकास गति को तेजी से खत्म कर सकती है। अधिक प्रबंधित समुद्री वातावरणों के विपरीत, लक्षद्वीप के रीफ महत्वपूर्ण मानवजनित दबावों का सामना कर रहे हैं, जिसमें ऐतिहासिक रूप से अस्थिर मछली पकड़ने की प्रथाएं और पर्यटन से बढ़ता प्रदूषण शामिल है।

वैज्ञानिक निहितार्थ

भविष्य के शोध में कॉलोनी की सटीक आयु की पुष्टि के लिए स्क्लेरोक्रोनोलॉजिकल डेटिंग (sclerochronological dating) पर ध्यान केंद्रित किए जाने की संभावना है। यदि ये अनुमान सही साबित होते हैं, तो "पोटैटो पैच" पिछले हजार वर्षों में हिंद महासागर की जलवायु परिवर्तनशीलता का एक जीवित ऐतिहासिक रिकॉर्ड बन जाएगा। संरक्षणवादियों के लिए, प्राथमिक लक्ष्य अब केवल अवलोकन से सक्रिय सुरक्षा की ओर बढ़ना है। इसका उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि क्या इस विशेष 'पावना क्लैवस' स्ट्रेन के आनुवंशिक मार्करों का उपयोग, क्षेत्र की अधिक नाजुक और गर्मी-संवेदनशील कोरल प्रजातियों के लचीलेपन को मजबूत करने के लिए सहायता प्राप्त विकास (assisted evolution) प्रयासों में किया जा सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.