Maharashtra का बड़ा कदम: ₹500 Cr के प्लास्टिक रीसाइक्लिंग नेटवर्क की शुरुआत

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Maharashtra का बड़ा कदम: ₹500 Cr के प्लास्टिक रीसाइक्लिंग नेटवर्क की शुरुआत
Overview

महाराष्ट्र सरकार ने प्लास्टिक रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए Recove Ventures के साथ मिलकर अगले 10 सालों में **₹500 करोड़** का एक बड़ा नेटवर्क बनाने की घोषणा की है। इस साझेदारी का मुख्य मकसद हाई-डेंसिटी पॉलीथीन (HDPE) और पॉलीप्रोपाइलीन (PP) जैसे प्लास्टिक की रिकवरी दर को बढ़ाना है, जो अभी **30%** से भी कम है।

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₹500 करोड़ की पार्टनरशिप से बदलेगी प्लास्टिक रीसाइक्लिंग की तस्वीर

महाराष्ट्र सरकार ने Recove Ventures Private Ltd के साथ एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) साइन किया है। यह 10 साल की पार्टनरशिप ₹500 करोड़ से ज्यादा की है और इसका लक्ष्य पूरे राज्य में एक मजबूत प्लास्टिक रीसाइक्लिंग और मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम तैयार करना है। यह पहल इसलिए अहम है क्योंकि PET जैसे प्लास्टिक की रिकवरी दर जहां 95% तक है, वहीं HDPE और PP की रिकवरी दर 30% के नीचे अटकी हुई है।

नई एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (EPR) रूल्स के तहत, कंपनियों को अब अपने उत्पादों में ज्यादा से ज्यादा रीसाइकल्ड प्लास्टिक का इस्तेमाल करना होगा। अगले दो से तीन सालों में यह टारगेट 30% से बढ़कर करीब 60% हो जाएगा। इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक, अगर रिकवरी दर में सुधार नहीं हुआ तो भारत 2025 से 2030 के बीच $36 बिलियन के कीमती रीसाइक्लेबल मटेरियल को खो सकता है।

इस प्लान के तहत पहला प्लांट ₹35 करोड़ की लागत से एडिशनल जलगांव MIDC में लगेगा। यह HDPE और PP रीसाइक्लिंग प्लांट अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच चालू हो जाएगा। यहां एक्सट्रूज़न, ग्रैनुलेशन और डीप-वैक्यूम डीओडोराइजेशन जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके पैकेजिंग, ऑटोमोटिव और कंज्यूमर गुड्स के लिए इंडस्ट्रियल-ग्रेड ग्रैन्यूल्स बनाए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट से करीब 100 डायरेक्ट और 1,500 से ज्यादा इनडायरेक्ट नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।

Recove Ventures: तेज़ी से उभरता खिलाड़ी

Recove Ventures, जो 2024 में स्थापित हुई है, एक B2B सर्कुलर इकॉनमी प्लेटफॉर्म है। कंपनी ने हाल ही में $597,000 की सीड फंडिंग जुटाई है और पिछले छह महीनों में अपने रेवेन्यू में 12 गुना की वृद्धि दर्ज की है। बेंगलुरु में उनका प्लांट हर महीने 415 टन से ज्यादा मटेरियल प्रोसेस कर रहा है। भारत का प्लास्टिक रीसाइक्लिंग मार्केट तेजी से बढ़ने वाला है और वेस्ट मैनेजमेंट सेक्टर 2030 तक $19 बिलियन को पार कर सकता है।

इस सेक्टर के अन्य प्रमुख खिलाड़ियों में Ganesha Ecosphere, Gravita India और Banyan Nation शामिल हैं। Recove का लक्ष्य एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना है जो क्वालिटी और ट्रेसिबिलिटी दोनों सुनिश्चित करे, ताकि वर्तमान खंडित सप्लाई चेन में सुधार लाया जा सके। महाराष्ट्र सरकार भी MIDC एरिया में जमीन की प्राथमिकता पर आवंटन और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस जैसी सुविधाएं देकर इस पहल का समर्थन कर रही है।

चुनौतियाँ और भविष्य की राह

Recove Ventures के सामने बड़ी चुनौतियाँ भी हैं। ₹500 करोड़ के बड़े नेटवर्क के लिए कंपनी को अभी काफी बड़ी कैपिटल और ऑपरेशनल क्षमता साबित करनी होगी, जो कि उसकी मौजूदा $597,000 की सीड फंडिंग से काफी ज्यादा है। दूसरी तरफ, भारतीय रीसाइक्लिंग इंडस्ट्री में वेस्ट की खराब सेग्रीगेशन (अलग-अलग करना) और इनफॉर्मल सेक्टर के दबदबे के कारण रॉ मटेरियल की क्वालिटी में असंगति एक बड़ी समस्या है।

बाजार में Banyan Nation और Shakti Plastic Industries जैसी स्थापित कंपनियों के साथ-साथ कई स्टार्टअप्स भी हैं, जिससे यह क्षेत्र काफी कॉम्पिटिटिव है। ब्रांड्स EPR की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए भरोसेमंद पार्टनर की तलाश में हैं। Recove को अपनी क्षमता, ट्रेसिबिलिटी और क्वालिटी साबित करनी होगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.