केरल सरकार ने केंद्र से Western Ghats के 'इकोलॉजिकली सेंसिटिव एरिया' (ESA) ड्राफ्ट से **131** गांवों और लगभग **10,000 वर्ग किलोमीटर** क्षेत्र को बाहर करने की मांग की है। **24 सितंबर** की डेडलाइन से पहले यह कदम किसानों और स्थानीय निवासियों की जमीन बचाने के लिए उठाया गया है।
क्या है पूरा मामला?
केरल सरकार इस वक्त केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय के साथ मिलकर Western Ghats में 'इकोलॉजिकली सेंसिटिव एरिया' (ESA) पर आए लेटेस्ट ड्राफ्ट को लेकर बातचीत कर रही है। राज्य प्रशासन ने स्पष्ट रूप से 131 गांवों और लगभग 9,993 वर्ग किलोमीटर के दायरे को इस सूची से हटाने की अपील की है। राज्य के अधिकारियों का तर्क है कि अगर मौजूदा ड्राफ्ट बिना किसी बदलाव के लागू हुआ, तो इससे स्थानीय किसानों की आजीविका और निवासियों के अधिकारों पर गहरा असर पड़ेगा।
डेडलाइन और आगे की चुनौती
केंद्रीय मंत्रालय ने यह ड्राफ्ट 25 जुलाई, 2026 को जारी किया था, जिसमें राज्यों को अपने सुझाव या आपत्तियां दर्ज करने के लिए 60 दिनों का समय दिया गया था। 24 सितंबर की समय सीमा तेजी से करीब आ रही है, जिसे देखते हुए राज्य सरकार अब वैज्ञानिक अध्ययनों का सहारा ले रही है ताकि इन क्षेत्रों को प्रतिबंधित सूची से बाहर निकाला जा सके।
निवेशकों और बिजनेस पर क्या असर?
इन्वेस्टर्स और बिजनेस के नजरिए से यह पॉलिसी चर्चा बहुत अहम है, क्योंकि ESA में शामिल होने के बाद जमीन के इस्तेमाल पर सख्त पाबंदियां लग जाती हैं। अक्सर ऐसी क्लासिफिकेशन के बाद माइनिंग, क्वारिंग (Quarrying), बड़े कंस्ट्रक्शन और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में बड़ी बाधाएं आ जाती हैं। अगर सरकार की मांग नहीं मानी गई, तो इन इलाकों में प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ सकती है और मंजूरियां मिलने में देरी हो सकती है।
फिलहाल माइनिंग, रियल एस्टेट, टूरिज्म और इन्फ्रा सेक्टर पर नजर रखने वाले लोगों के लिए यह अपडेट काफी संवेदनशील है। आने वाले समय में केंद्र सरकार का इस मांग पर क्या फैसला आता है, वही तय करेगा कि इन क्षेत्रों में बिजनेस का भविष्य क्या होगा।
