प्रोजेक्ट्स को मिलेगा नया बूस्ट
यह डील Antony Waste Handling Cell और भारत के तेजी से बढ़ते वेस्ट-टू-एनर्जी सेक्टर के लिए एक बड़ा कदम है। JFE Engineering इन प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) का जिम्मा संभालेगी। ये प्रोजेक्ट्स आंध्र प्रदेश के काडापा (Kadapa) और कुरनूल (Kurnool) में लगने वाले हैं। इन दोनों वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट्स की कुल लागत ₹650 करोड़ से ₹700 करोड़ के बीच आने का अनुमान है।
टर्नओवर और फंडिंग का गणित
Antony Waste को उम्मीद है कि ये प्रोजेक्ट्स अगले बीस सालों में सालाना ₹3,200 करोड़ का जबरदस्त टर्नओवर (Turnover) जेनरेट कर सकते हैं। हालांकि, इन प्रोजेक्ट्स की फंडिंग का तरीका चिंता का विषय बना हुआ है। कुल लागत का बड़ा हिस्सा, यानी 70-75%, कर्ज (Debt) के जरिए उठाया जाएगा। प्रत्येक प्लांट रोज 1,000 टन कचरा प्रोसेस करेगा और 15 MW बिजली पैदा करेगा। पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) के तहत, अतिरिक्त बिजली ₹8.10 प्रति यूनिट की दर से बेची जाएगी।
विदेशी निवेश और सेक्टर की उम्मीदें
वेस्ट-टू-एनर्जी सेक्टर में JFE Engineering का आना भारत के लिए एक बड़ा बूस्ट है। यह न केवल विदेशी निवेश को आकर्षित करता है, बल्कि देश की बढ़ती कचरा समस्या और स्वच्छ ऊर्जा की जरूरत को पूरा करने की दिशा में भी अहम है। भारत का वेस्ट-टू-एनर्जी कैपेसिटी अभी काफी कम है, जो इस सेक्टर में ग्रोथ की अपार संभावनाएं दिखाता है। भारत सरकार भी ऐसे प्रोजेक्ट्स को लगातार सपोर्ट कर रही है।
कर्ज़ का बोझ और तय PPA दरें बनीं चिंता
भारी विदेशी निवेश और सेक्टर ग्रोथ की अच्छी खबरों के बावजूद, Antony Waste के प्रोजेक्ट्स की फाइनेंसियल स्ट्रक्चर (Financial Structure) में कुछ बड़े रिस्क हैं। 70-75% कर्ज के जरिए फंडिंग की वजह से रिपेमेंट का बड़ा बोझ रहेगा। अगर रेवेन्यू (Revenue) उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा या खर्च बढ़ गया, तो यह कर्ज एक बड़ी समस्या बन सकता है। साथ ही, पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) की तय दर ₹8.10 प्रति यूनिट भविष्य में ज्यादा प्रॉफिट की गुंजाइश को सीमित करती है। ऐसे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भारी कर्ज का स्तर कभी-कभी ब्याज दरों में बदलाव और मार्केट की मुश्किलों से जूझता है।