India का नया EPR Portal: उम्मीदें ज्यादा, इम्प्लीमेंटेशन की चुनौतियां हावी?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
India का नया EPR Portal: उम्मीदें ज्यादा, इम्प्लीमेंटेशन की चुनौतियां हावी?
Overview

भारत के पर्यावरण मंत्रालय ने ईपीआर (Extended Producer Responsibility) के नियमों का पालन करने के लिए एक नया, एकीकृत डिजिटल पोर्टल लॉन्च किया है। यह पोर्टल रीसाइक्लिंग कंप्लायंस को डिजिटाइज करने और वेस्ट स्ट्रीम्स को ट्रैक करने में मदद करेगा।

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पोर्टल का मकसद: डिजिटल हो रीसाइक्लिंग कंप्लायंस

पर्यावरण मंत्रालय का यह नया कदम पर्यावरण प्रबंधन के लिए डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करने की एक स्ट्रैटेजिक पहल है। इस नए EPR पोर्टल के जरिए, सरकार प्रोड्यूसर्स, इम्पोर्टर्स और ब्रांड ओनर्स (PIBOs) के साथ-साथ वेस्ट हैंडलर्स के लिए कंप्लायंस को आसान बनाने की कोशिश कर रही है। इसका मुख्य लक्ष्य रीसाइक्लिंग के नतीजों और सर्टिफिकेशन्स की ट्रेसबिलिटी और एफिशिएंसी को बढ़ाना है। भारत में अब प्लास्टिक, ई-वेस्ट, बैटरी और टायरों के लिए EPR रूल्स लागू हैं, जो सर्कुलर इकोनॉमी और रिसोर्स एफिशिएंसी की दिशा में देश के लक्ष्यों के अनुरूप हैं।

बड़ी चुनौतियां: सिस्टम में अभी भी गैप्स

हालांकि, इस पोर्टल की सफलता काफी हद तक उन पुरानी स्ट्रक्चरल दिक्कतों को दूर करने पर निर्भर करेगी, जिन्होंने पिछले प्रयासों को बाधित किया है। मटेरियल रीसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MRAI) जैसी इंडस्ट्री बॉडीज ने सरकारी बॉडीज के बीच फैली इनएफिशिएंसी और खराब कोऑर्डिनेशन से निपटने के लिए एक नेशनल अथॉरिटी की मांग की है। ई-वेस्ट के मामले में EPR कंप्लायंस में गिरावट देखी जा रही है, जो एक बड़ा इम्प्लीमेंटेशन गैप दिखाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कमजोर एनफोर्समेंट, अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और इनफॉर्मल वेस्ट सेक्टर को शामिल न करना बड़ी बाधाएं हैं। पोर्टल की असली कामयाबी सिर्फ समस्याओं को डिजिटाइज करने के बजाय, जमीनी स्तर पर असल कोऑर्डिनेशन और प्रभावी काम को बढ़ावा देने पर निर्भर करेगी।

जोखिम और समावेशिता: आगे की राह

ब्रॉड लेवल पर देखें तो, पोर्टल के असल असर को कई बड़े जोखिमों से खतरा है। MRAI ने चेतावनी दी है कि 'वन-साइज-फिट्स-ऑल' वाला एप्रोच कुशल रीसाइक्लिंग मार्केट्स, जैसे नॉन-फेरस मेटल्स के मार्केट्स को बाधित कर सकता है। भारत के वेस्ट मैनेजमेंट का एक बड़ा हिस्सा इनफॉर्मल सेक्टर पर निर्भर करता है, जिसे फॉर्मल EPR से ज्यादातर बाहर रखा गया है। यह पोर्टल छोटे बिजनेसेज (MSMEs) के लिए डिजिटल कंप्लायंस से जूझने की खाई को और चौड़ा कर सकता है, और उन्हें अनौपचारिक कामों की ओर धकेल सकता है। पिछले EPR सर्टिफिकेशन्स से मिले रीसाइक्लिंग डेटा की सटीकता पर भी चिंताएं बनी हुई हैं। एक नेशनल अथॉरिटी और इनफॉर्मल सेक्टर को शामिल करने की योजना के बिना, यह पोर्टल असल बदलाव लाने के बजाय सिर्फ एक कागजी एक्सरसाइज बनकर रह सकता है।

आउटलुक: पॉलिसी और प्रैक्टिकल रियलिटी के बीच की खाई

भारत का वेस्ट मैनेजमेंट मार्केट रेगुलेशंस और टेक्नोलॉजी से प्रेरित होकर काफी बढ़ने की उम्मीद है, और यह $18 बिलियन से भी ज्यादा हो सकता है। सर्कुलर इकोनॉमी में बड़े आर्थिक फायदे छिपे हैं। हालांकि, इसे हासिल करने के लिए सिर्फ पॉलिसी और डिजिटल टूल्स से कहीं ज्यादा की जरूरत है; इसके लिए मजबूत ऑन-ग्राउंड इम्प्लीमेंटेशन और इकोसिस्टम बिल्डिंग की दरकार है। EPR पोर्टल की असली सफलता को उसकी जवाबदेही सुनिश्चित करने, रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय वेस्ट मैनेजमेंट प्लान में सभी स्टेकहोल्डर्स को एकजुट करने की क्षमता से आंका जाएगा।

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