एक नई रिपोर्ट के मुताबिक हिमालय के ग्लेशियर **65%** तेज रफ्तार से पिघल रहे हैं। यह स्थिति जल सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के लिए खतरा है, जिसका सीधा असर हाइड्रोपावर, कृषि और निर्माण क्षेत्र की कंपनियों पर पड़ सकता है।
हालिया पर्यावरणीय रिपोर्ट ने आगाह किया है कि पिछले एक दशक में हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने की दर में 65% का उछाल आया है। यह ट्रेंड न केवल पर्यावरणीय बल्कि दक्षिण एशिया की आर्थिक स्थिरता के लिए भी एक बड़ा जोखिम है। हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र भारत की अर्थव्यवस्था में करीब 20% का योगदान देता है, जिसमें कृषि, हाइड्रोपावर और पर्यटन जैसे मुख्य क्षेत्र शामिल हैं।
हाइड्रोपावर ऑपरेशन्स पर खतरा
उत्तर भारत में कई बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स ग्लेशियर से निकलने वाली नदियों पर निर्भर हैं। ग्लेशियरों के तेजी से पीछे हटने से नदियों का बहाव अनिश्चित हो सकता है, जो इन प्लांट की क्षमता (Capacity Utilization) को प्रभावित करेगा। निवेशकों को कंपनियों की मैनेजमेंट कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए कि वे जलवायु जोखिम, पानी की उपलब्धता और लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्ट वायबिलिटी को कैसे मैनेज कर रहे हैं। अनिश्चित जल प्रवाह से मेंटेनेंस कॉस्ट में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन पर दबाव
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 56 ऐसी झीलें हैं जो आपदा के लिहाज से 'हाई रिस्क' श्रेणी में हैं। इनके फटने से आने वाली बाढ़ सड़कों, पुलों और बिजली के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में काम करने वाली कंस्ट्रक्शन कंपनियों के लिए लैंडस्लाइड और फ्लैश फ्लड्स के कारण प्रोजेक्ट्स में देरी का जोखिम बढ़ गया है। हालांकि, आपदा-रोधी इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी खर्च बढ़ सकता है, लेकिन इंजीनियरिंग फर्मों पर वित्तीय बोझ भी बढ़ेगा।
लॉन्ग-टर्म आर्थिक और पॉलिसी प्रभाव
कृषि क्षेत्र पर इसका असर सबसे बड़ा हो सकता है, क्योंकि उत्तर भारत की सिंचाई व्यवस्था ग्लेशियर-फेड नदियों पर टिकी है। पानी की कमी से फसलों की पैदावार और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव आ सकता है, जिससे फूड इन्फ्लेशन और ग्रामीण मांग पर दबाव बन सकता है। भविष्य में सरकार क्लाइमेट एडॉप्टेशन और वॉटर कंजर्वेशन के लिए बजट आवंटन बढ़ा सकती है, जिससे डिजास्टर मैनेजमेंट में लगी कंपनियों को अवसर मिलेंगे, लेकिन साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में सख्त पर्यावरणीय नियम भी लागू किए जा सकते हैं।
