हिमाचल प्रदेश का फॉरेस्ट डिपार्टमेंट अब जंगलों में **ग्लाइफोसेट (glyphosate)** के अवैध इस्तेमाल के खिलाफ FIR दर्ज करने जा रहा है। खासकर मटर की खेती के लिए हो रहे इस गलत इस्तेमाल पर लगाम लगाने की यह बड़ी कार्रवाई है, जो रेगुलेटरी नियमों को सख्त बनाने का संकेत दे रही है।
जंगलों में पेस्टिसाइड का भारी हंगामा!
हिमाचल प्रदेश का फॉरेस्ट डिपार्टमेंट अब जंगलों में ग्लाइफोसेट (glyphosate) जैसे प्रतिबंधित पेस्टिसाइड के अवैध इस्तेमाल के खिलाफ सख्त एक्शन लेने वाला है। विभाग ने कई जगहों पर, खासकर मंडी जिले के थाची रेंज जैसे इलाकों में, प्राकृतिक वनस्पति को हटाकर मटर की खेती के लिए इस केमिकल के इस्तेमाल पर FIR दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
नियमों का उल्लंघन और पाबंदियां
यह मामला ग्लाइफोसेट के गलत इस्तेमाल से जुड़ा है, जिसके भारत में कड़े रेगुलेटरी नियम हैं। आपको बता दें कि अक्टूबर 2022 में केंद्र सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन जारी कर ग्लाइफोसेट के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। नए नियमों के तहत, इस केमिकल का इस्तेमाल केवल प्रोफेशनल पेस्ट कंट्रोल ऑपरेटर्स ही कर सकते थे, आम खेती के लिए नहीं। लेकिन जंगलों में, जैसे कि मटर की खेती के लिए, इसका अवैध इस्तेमाल हो रहा है, जिससे इसके वितरण और उपयोग पर नजर रखने में बड़ी चूक हो रही है।
पर्यावरण और सेहत पर खतरा
अधिकारियों और पर्यावरणविदों ने इस गैर-कानूनी पेस्टिसाइड के इस्तेमाल से जुड़े कई बड़े खतरों की ओर इशारा किया है। हिमालय नीति अभियान जैसे पर्यावरण समूहों का कहना है कि यह केमिकल मिट्टी की सेहत को खराब कर सकता है, आसपास के पानी के स्रोतों को दूषित कर सकता है और ऊंचाई वाले जंगली इलाकों में जैव विविधता को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा, स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी इस बात से चिंतित हैं कि ग्लाइफोसेट को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों ने कैंसर का कारण बनने वाला संभावित केमिकल बताया है। फार्मिंग के इलाकों में इसका गलत इस्तेमाल, स्थानीय किसानों और निवासियों के लिए, जो अक्सर बचाव के उचित साधनों से लैस नहीं होते, सेहत के जोखिम को बढ़ाता है।
कृषि इनपुट्स का बड़ा संदर्भ
हालांकि यह खास कार्रवाई जंगल की अवैध कटाई और गैर-कानूनी खेती में शामिल लोगों को निशाना बना रही है, लेकिन यह भारत में एग्री-केमिकल्स सेक्टर के बदलते रेगुलेटरी माहौल की याद दिलाती है। जैसे-जैसे सरकारें पेस्टिसाइड के इस्तेमाल पर निगरानी बढ़ा रही हैं, कंपनियों और किसानों को ऐसे माहौल का सामना करना पड़ रहा है जहां सुरक्षा और पर्यावरण मानकों का पालन करना और भी जरूरी हो गया है। कृषि क्षेत्र के लिए, ये घटनाएं प्रोडक्ट के सही इस्तेमाल, राज्य और केंद्र सरकार की गाइडलाइन्स का पालन करने और प्रतिबंधित पदार्थों के गलत इस्तेमाल पर सख्त सजा के महत्व को उजागर करती हैं।
जंगलों के स्थानीय अधिकारी, जैसे कि मंडी के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर, ने पुष्टि की है कि उनकी टीमें साइट का निरीक्षण कर रही हैं ताकि दोषियों का पता लगाया जा सके। विभाग ने अवैध रूप से काटी गई जमीन पर उगाई गई फसलों को नष्ट करना भी शुरू कर दिया है। भविष्य में इस पर नजर रखने के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ऐसी कार्रवाई अन्य इलाकों में भी बढ़ाई जाती है और यह केमिकल के इस्तेमाल और भूमि संरक्षण पर राज्य-स्तरीय कृषि नीतियों को कैसे प्रभावित करती है।
