कोयला खदानों का 'छुपा' मीथेन उत्सर्जन: जलवायु के लिए बड़ा संकट, **89%** अनरिपोर्टेड!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
कोयला खदानों का 'छुपा' मीथेन उत्सर्जन: जलवायु के लिए बड़ा संकट, **89%** अनरिपोर्टेड!
Overview

दुनिया भर की कोयला खदानों से 2023 में करीब **3.5 करोड़ टन** मीथेन गैस निकली, जो एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है। चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें से **89%** उत्सर्जन को आधिकारिक रिपोर्टों में दर्ज ही नहीं किया गया। एक हालिया एम्बर (Ember) रिपोर्ट के अनुसार, यह बड़ा डेटा गैप कोयले के असली जलवायु प्रभाव को छिपा रहा है।

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कोयले की अनदेखी जलवायु लागत

दुनिया भर की कोयला खदानों से हर साल भारी मात्रा में मीथेन गैस निकल रही है, जो एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है। लेकिन, सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसका 89% हिस्सा किसी भी आधिकारिक रिपोर्ट में दर्ज ही नहीं हो रहा है। 2023 में, कोयला खदानों से अनुमानित 3.5 करोड़ टन मीथेन का उत्सर्जन हुआ। लेकिन, हैरानी की बात यह है कि इसमें से 89% को आधिकारिक सरकारी इन्वेंट्री में शामिल ही नहीं किया गया। यह बड़ा डेटा गैप नीति निर्माताओं और आम जनता को कोयले के कारण होने वाली ग्लोबल वार्मिंग के असली पैमाने से अनजान रखता है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि कोयला खदानों से निकलने वाली मीथेन (CMM) का उत्सर्जन अकेले तेल या गैस उद्योगों के उत्सर्जन के बराबर है। कुछ अध्ययनों के अनुसार, यह उत्सर्जन आधिकारिक तौर पर रिपोर्ट किए गए आंकड़ों से दोगुना तक हो सकता है, जिससे कोयला खदानें दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी एमिटर (emitter) बन जाती हैं।

हालांकि 2021 में 8,100 मिलियन टन से अधिक और 2023 में 8,650 मिलियन टन से अधिक कोयला उत्पादन हुआ, लेकिन खदानों से मीथेन का कुल उत्सर्जन 2021 से लगभग स्थिर बना हुआ है। यह ग्लोबल मीथेन प्लेज (Global Methane Pledge) जैसे जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने में एक बड़ी बाधा है, जो 2030 तक 30% कटौती का लक्ष्य रखता है।

उत्सर्जन का केंद्रीकरण और छूटा आर्थिक अवसर

यह समस्या कुछ देशों में केंद्रित है। दुनिया भर के कुल CMM उत्सर्जन का लगभग 94% सिर्फ सात देशों - चीन, अमेरिका, रूस, भारत, ऑस्ट्रेलिया, पोलैंड और यूक्रेन से होता है। अकेले चीन पर अनुमानित 76% CMM उत्सर्जन का बोझ है। यह एकाग्रता (concentration) लक्षित नीतियों के माध्यम से बड़े जलवायु लाभ का अवसर प्रदान करती है। हालांकि, समस्या का मूल कारण बड़े पैमाने पर हो रहा अंडररिपोर्टिंग (underreporting) और प्रत्यक्ष मापन (direct measurement) की कमी है। रिपोर्ट किए गए कोयला उत्पादन का 99% प्रत्यक्ष मापन के बजाय सामान्य उत्सर्जन कारकों (generic emission factors) पर निर्भर करता है।

मौजूदा तकनीकें, जैसे वेंटिलेशन एयर मीथेन (VAM) सिस्टम और ड्रेनेज मीथेन कैप्चर, 2030 तक वैश्विक CMM उत्सर्जन को 54% से 63% तक कम कर सकती हैं। इसमें से लगभग 12% उत्सर्जन को पकड़ने और उपयोग करने का काम बिना किसी अतिरिक्त लागत के किया जा सकता है, क्योंकि पकड़ी गई गैस को बेचा या इस्तेमाल किया जा सकता है। यह सालाना लगभग 15 अरब क्यूबिक मीटर मीथेन को कैप्चर करने की क्षमता है, जो एक बड़ा आर्थिक अवसर भी है।

प्रणालीगत विफलताएं और नियामक देरी

कोयला खदानों से मीथेन उत्सर्जन की निरंतर अंडररिपोर्टिंग और मापन की कमी एक बड़ी प्रणालीगत विफलता (systemic failure) है। 2023 में, 73 कोयला उत्पादक देशों में से केवल 23 देशों ने ही संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) को CMM डेटा जमा किया। स्वतंत्र अनुमान बताते हैं कि शीर्ष नौ मीथेन उत्सर्जक देशों में से छह अपने उत्सर्जन को काफी कम करके आंक रहे हैं। इससे न केवल पर्यावरणीय प्रभाव छिपता है, बल्कि सिद्ध और लागत प्रभावी शमन तकनीकों (abatement technologies) को अपनाने में भी देरी होती है, जो 50% से अधिक उत्सर्जन को कम कर सकती हैं।

यूरोपीय संघ (EU) ने मीथेन विनियमन पेश किया है, लेकिन इसका प्रभाव अभी विकसित हो रहा है। अमेरिका में भी पहलें हैं, लेकिन परित्यक्त खदानों से मीथेन उत्सर्जन एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। साइट-स्तरीय डेटा और एक सुसंगत वैश्विक निगरानी ढांचे (monitoring framework) की कमी के कारण कोयला खदानों के प्रदूषण का असली बोझ काफी हद तक अनसुलझा है।

भविष्य का दृष्टिकोण: मीथेन शमन के लिए समय के खिलाफ दौड़

मीथेन शमन तकनीकों के बाजार में मजबूत वृद्धि की उम्मीद है। वैश्विक मीथेन शमन प्रौद्योगिकी बाजार 2033 तक लगभग 8.64 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें 8.6% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) देखी जा सकती है। एशिया प्रशांत क्षेत्र में यह वृद्धि दर 10.2% तक पहुंचने की उम्मीद है। विशेषज्ञ अनुमान लगाते हैं कि मौजूदा तकनीकों का उपयोग करके वैश्विक CMM उत्सर्जन का 50% से अधिक पकड़ा जा सकता है, जिसकी औसत लागत लगभग 230 अमेरिकी डॉलर प्रति टन मीथेन है। हालांकि, इस क्षमता को साकार करने के लिए निगरानी (monitoring), पारदर्शी रिपोर्टिंग (transparent reporting) और शमन उपायों (mitigation measures) में बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.