गुजरात में प्रदूषण नियमों का पालन ठीक से नहीं हो रहा है। CAG की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अहमदाबाद, सूरत जैसे बड़े शहरों में PM10 का स्तर राष्ट्रीय मानकों से काफी ऊपर है। यह स्थिति लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट प्लानिंग को प्रभावित कर सकती है।
CAG की रिपोर्ट में क्या है खास?
मार्च 2026 में आई CAG (Comptroller and Auditor General) की रिपोर्ट गुजरात के शहरी वायु प्रदूषण पर चिंता बढ़ा रही है। रिपोर्ट बताती है कि अहमदाबाद, सूरत, राजकोट और वडोदरा जैसे प्रमुख औद्योगिक शहर 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के राष्ट्रीय मानक से कहीं ज्यादा PM10 का स्तर झेल रहे हैं। ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए यह एक बड़ा मुद्दा बन गया है, क्योंकि इससे राज्य की नीतियों और परिचालन में बदलाव आ सकते हैं।
ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की बड़ी लापरवाही
CAG रिपोर्ट ने गुजरात ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की कड़ी आलोचना की है। रिपोर्ट के अनुसार, लाखों गाड़ियां एक्सपायर्ड पॉल्यूशन सर्टिफिकेट के साथ चल रही हैं। फिटनेस सर्टिफिकेट भी बिना ठीक से जांचे-परखे जारी किए जा रहे हैं। जब इस तरह की लापरवाही सामने आती है, तो सरकार अक्सर कड़े कदम उठाती है। ऐसे में, पुराने डीजल वाहनों पर बैन या नए सख्त उत्सर्जन मानकों की जरूरत पड़ सकती है, जिससे ट्रांसपोर्ट कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है।
पेट्रोल-डीजल वाहनों का दबदबा
गुजरात में वाहनों की स्थिति भी चिंताजनक है। 2025 में 20.90 लाख नई गाड़ियां रजिस्टर हुईं, जिनमें ज्यादातर पेट्रोल और डीजल इंजन वाली हैं। सीएनजी (CNG) का इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन अभी भी यह कुल रजिस्टर्ड बेड़े का एक छोटा सा हिस्सा है। क्लीन एयर प्लान के बावजूद जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) पर चलने वाले वाहनों की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि भविष्य में सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) या अन्य वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा दे सकती है।
आगे क्या हो सकता है?
अब सबकी नजरें राज्य सरकार के कदमों पर हैं। CAG की रिपोर्ट के बाद, सरकार पुराने वाहनों के आधुनिकीकरण, पॉल्यूशन टेस्टिंग को कड़ा करने या ग्रीन ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए नई सब्सिडी की घोषणा कर सकती है। इससे भारी रोड लॉजिस्टिक्स पर निर्भर कंपनियों की लागत संरचना बदल सकती है। ऑटोमोटिव और ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़े निवेशकों और रणनीतिकारों को इस पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।
