गुजरात बॉक्साइट माइनिंग प्रोजेक्ट को मिली हरी झंडी, पर समुद्री क्षेत्र के पास होने से बढ़ेंगी मुश्किलें

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
गुजरात बॉक्साइट माइनिंग प्रोजेक्ट को मिली हरी झंडी, पर समुद्री क्षेत्र के पास होने से बढ़ेंगी मुश्किलें

गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले में एक बॉक्साइट और मार्ल माइनिंग प्रोजेक्ट को पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) के लिए सिफारिश मिली है। यह प्रोजेक्ट एक संरक्षित समुद्री वन्यजीव अभयारण्य (Marine Wildlife Sanctuary) से सिर्फ 1.6 किलोमीटर दूर है, जिससे प्रोजेक्ट डेवलपर के लिए पर्यावरण और नियामक अनुपालन (Regulatory Compliance) के जोखिम बढ़ गए हैं।

पर्यावरण मंजूरी की सिफारिश

29 जुलाई, 2026 को, पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (Expert Appraisal Committee - EAC) ने गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले के मेवासा ब्लॉक में एक नए बॉक्साइट और मार्ल माइनिंग प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरण मंजूरी की सिफारिश की है। इस प्रोजेक्ट का विकास L and S Company द्वारा किया जा रहा है।

समुद्री अभयारण्य से निकटता

प्रस्तावित साइट भारत के पहले समुद्री वन्यजीव अभयारण्य से लगभग 1.6 किलोमीटर और मरीन नेशनल पार्क से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ये संरक्षित क्षेत्र कच्छ की खाड़ी के दक्षिणी तट पर हैं और कोरल रीफ, मैंग्रोव और विभिन्न प्रकार की मछलियों और पक्षियों जैसी विविध पारिस्थितिकीय प्रणालियों (Ecosystems) के लिए जाने जाते हैं।

शर्तें और चुनौतियां

हालांकि प्रोजेक्ट को प्रारंभिक मंजूरी की सिफारिश मिली है, यह कई शर्तों के अधीन है। कंपनी को गुजरात राज्य के वन विभाग से वन्यजीव संरक्षण योजना (Wildlife Conservation Plan) के लिए मंजूरी लेनी होगी। इसके अलावा, प्रोजेक्ट में क्षेत्र के वन्यजीवों पर तनाव को कम करने और मानव-पशु संघर्ष के जोखिमों को संबोधित करने के लिए हस्तक्षेप शामिल करने होंगे।

प्रोजेक्ट की पर्यावरण प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment) रिपोर्ट का दावा है कि 1.6 किलोमीटर की दूरी एक प्राकृतिक भौतिक बाधा के रूप में काम करती है, जिससे अभयारण्य पर प्रभाव कम होता है। हालांकि, पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के पास के प्रोजेक्ट अक्सर बढ़ी हुई नियामक जांच (Regulatory Scrutiny) और कानूनी या स्थानीय चुनौतियों का सामना करते हैं। प्रोजेक्ट डेवलपर के लिए, इन पर्यावरणीय स्थितियों का कड़ाई से पालन करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी भी अनुपालन विफलता या आवश्यक वन विभाग की मंजूरी प्राप्त करने में देरी से प्रोजेक्ट की समय-सीमा बाधित हो सकती है और परिचालन लागत बढ़ सकती है।

निवेशक और हितधारक इस विकास पर नजर रख सकते हैं और अंतिम मंजूरी की स्थिति और वन्यजीव संरक्षण योजना के कार्यान्वयन पर अपडेट की उम्मीद कर सकते हैं। प्रोजेक्ट का भविष्य का निष्पादन कंपनी की मेवासा ब्लॉक के लिए अनुमानित परिचालन पैमाने को बनाए रखते हुए इन पर्यावरणीय अनुपालन आवश्यकताओं को प्रबंधित करने की क्षमता पर बहुत अधिक निर्भर करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.