आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में Google, AdaniConneX और Bharti Airtel का **$15 बिलियन** (लगभग **₹12.5 लाख करोड़**) का बड़ा डेटा सेंटर प्रोजेक्ट विवादों में घिर गया है। स्थानीय लोग और पर्यावरण समूह पानी की कमी और कंबलकonda वन्यजीव अभयारण्य को होने वाले नुकसान को लेकर विरोध कर रहे हैं। इस मामले की सुनवाई **24 अगस्त, 2026** को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में होगी।
प्रोजेक्ट पर क्यों उठा विवाद?
भारत के डिजिटल और AI इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए विशाखापत्तनम में $15 बिलियन (लगभग ₹12.5 लाख करोड़) का यह बड़ा डेटा सेंटर प्रोजेक्ट तैयार हो रहा था। लेकिन, अब यह प्रोजेक्ट स्थानीय कार्यकर्ताओं और पर्यावरण समूहों के कड़े विरोध का सामना कर रहा है।
मुख्य चिंता प्रोजेक्ट की पानी की जरूरत को लेकर है। बड़े डेटा सेंटर को ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में पानी की जरूरत होती है। विशाखापत्तनम पहले से ही पानी की समस्या से जूझ रहा है, और स्थानीय लोगों को डर है कि यह प्रोजेक्ट पानी के मौजूदा संसाधनों पर और दबाव डालेगा। इसके अलावा, प्रोजेक्ट कंबलकonda वन्यजीव अभयारण्य के करीब बन रहा है, जो कि तेंदुए और पैंगोलिन जैसे वन्यजीवों का घर है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रोजेक्ट से होने वाला शोर और औद्योगिक गतिविधि इस संरक्षित क्षेत्र को नुकसान पहुंचा सकती है।
कानूनी पेंच और सरकारी पक्ष
इस मामले में एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) दायर की गई है, जिसके बाद आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट इस केस की सुनवाई 24 अगस्त, 2026 को करेगा। इससे प्रोजेक्ट के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।
हालांकि, आंध्र प्रदेश सरकार प्रोजेक्ट के बचाव में उतरी है। सरकार का कहना है कि प्रोजेक्ट सभी कानूनी और पर्यावरण नियमों का पालन कर रहा है। अधिकारियों ने साफ किया है कि प्रोजेक्ट आवासीय या ग्रामीण आपूर्ति से पानी नहीं खींचेगा। प्रोजेक्ट डेवलपर्स का कहना है कि वे पारंपरिक पानी वाले तरीकों के बजाय, पानी के इस्तेमाल को कम करने के लिए एडवांस्ड एयर-कूलिंग टेक्नोलॉजी का उपयोग कर रहे हैं। सरकार ने इस बात से भी इनकार किया है कि प्रोजेक्ट को जल्दबाजी में या नियमों को ताक पर रखकर पर्यावरण मंजूरी दी गई हो।
निवेशकों और इंडस्ट्री पर असर
AdaniConneX और Bharti Airtel जैसी कंपनियों के लिए यह प्रोजेक्ट भारत के तेजी से बढ़ते डेटा सेंटर सेक्टर में एक बड़ा निवेश है। इससे रोजगार के अवसर पैदा होने और देश के AI इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। लेकिन, यह विरोध बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के लिए एक बढ़ता हुआ स्क्रूटनी ट्रेंड दिखाता है, खासकर जब वे पर्यावरण के संवेदनशील इलाकों में बन रहे हों। निवेशक और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स कोर्ट के फैसलों पर बारीकी से नजर रखेंगे, क्योंकि यह भविष्य में ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है।
