Delhi Metro Stations पर खुले 'अर्पण केंद्र': पुराने कपड़ों से बनेगी नई चीज़ें, महिलाओं को मिलेगा रोज़गार

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AuthorNeha Patil|Published at:
Delhi Metro Stations पर खुले 'अर्पण केंद्र': पुराने कपड़ों से बनेगी नई चीज़ें, महिलाओं को मिलेगा रोज़गार

दिल्ली सरकार ने शहर को स्वच्छ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अब दिल्ली मेट्रो के **10** बड़े स्टेशनों पर 'अर्पण केंद्र' खोले गए हैं, जहाँ पुराने कपड़ों को इकट्ठा करके उनसे नई चीज़ें बनाई जाएंगी। ये केंद्र स्थानीय सेल्फ-हेल्प ग्रुप की महिलाओं द्वारा चलाए जाएंगे, जिससे लैंडफिल में जाने वाला कचरा कम होगा और महिलाओं को रोज़गार भी मिलेगा। आप इन केंद्रों पर अपने पुराने कपड़े डोनेट कर सकते हैं और डिजिटल तरीके से इसकी ट्रैकिंग भी करवा सकते हैं।

'अर्पण केंद्र' क्या हैं और कैसे काम करेंगे?

दिल्ली सरकार ने कपड़ा रीसाइक्लिंग (Textile Recycling) की एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत, दिल्ली मेट्रो के 10 प्रमुख स्टेशनों पर 'अर्पण केंद्र' स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों का मकसद लोगों से पुराने और बेकार कपड़े इकट्ठा करना है। इन कपड़ों को बाद में बैग, धागे (Yarn) और नए कपड़े बनाने जैसे उत्पाद बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC), DMRC लेडीज़ वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन, स्टेट अर्बन लाइवलीहुड मिशन और रीसाइक्लिंग पार्टनर Clothes Box Foundation और Respun के सहयोग से चलाया जा रहा है।

कहाँ-कहाँ हैं ये केंद्र?

ये 'अर्पण केंद्र' शाहदरा, डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर हॉस्पिटल, मालवीय नगर, हौज खास, द्वारका, मोहन एस्टेट, लाजपत नगर, मयूर विहार फेज-1, पंजाबी बाग वेस्ट और शालीमार बाग जैसे मेट्रो स्टेशनों पर खोले गए हैं। ये केंद्र रोज़ाना सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक आम जनता के लिए खुले रहेंगे। मेट्रो नेटवर्क के अंदर इन केंद्रों को खोलकर सरकार का मकसद यात्रियों के लिए इन्हें आसानी से सुलभ बनाना और शहर के लैंडफिल में जाने वाले कपड़ों के कचरे को कम करना है।

महिलाओं को रोज़गार और डिजिटल ट्रैकिंग

इस पहल का एक अहम हिस्सा महिलाओं को सशक्त बनाना है। इन केंद्रों का प्रबंधन स्टेट अर्बन लाइवलीहुड मिशन के तहत सेल्फ-हेल्प ग्रुप से जुड़ी महिलाओं द्वारा किया जाएगा। इन महिलाओं को कपड़ों को छांटने (Segregation) और उन्हें दोबारा इस्तेमाल लायक बनाने (Upcycling) की ट्रेनिंग भी दी जाएगी, जिससे उन्हें नए हुनर सीखने को मिलेंगे। इसके अलावा, एक डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम भी लागू किया गया है। डोनेशन देने वाले लोग केंद्र पर QR कोड स्कैन करके अपना योगदान रजिस्टर कर सकते हैं। इससे एक डिजिटल सर्टिफिकेट मिलेगा और कलेक्शन की मात्रा और पारदर्शिता पर नज़र रखने के लिए डेटा एक सेंट्रल डैशबोर्ड में फीड होगा।

भविष्य की योजना और पर्यावरण को फायदा

यह प्रोजेक्ट शहरी कचरा प्रबंधन (Urban Waste Management) में सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार का कहना है कि अगर यह शुरुआती चरण सफल रहता है, तो इस मॉडल को शहर के और भी इलाकों में लागू किया जाएगा। यह पहल कपड़ों के रीसाइक्लिंग को एक औपचारिक प्रक्रिया में बदलने की ओर इशारा करती है, जिससे लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा को कम किया जा सकता है। इस प्रोजेक्ट की सफलता लोगों की भागीदारी, कलेक्शन पॉइंट से रीसाइक्लिंग पार्टनर तक लॉजिस्टिक्स की एफिशिएंसी और सेल्फ-हेल्प ग्रुप द्वारा लगातार अपसाइक्लिंग आउटपुट बनाए रखने पर निर्भर करेगी।

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