येरेवन में चल रहे 17वें Biodiversity Summit में सालाना **$200 बिलियन** की फंड की कमी ने चिंता बढ़ा दी है। लक्ष्य पूरा न होने से माइनिंग और कंस्ट्रक्शन जैसी इंडस्ट्रीज पर कड़े रेगुलेशन का खतरा बढ़ गया है।
19 अक्टूबर 2026 को आर्मेनिया के येरेवन में शुरू हुआ 17वां Conference of the Parties (COP17), 'कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क' (KMGBF) की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है। साल 2022 में तय किए गए 23 पर्यावरणीय लक्ष्यों में से आधे से भी कम 2030 की समयसीमा के अनुसार ट्रैक पर हैं। निवेशकों के लिए यह अंतर कॉर्पोरेट रणनीति और प्रोजेक्ट फिजिबिलिटी में बायोडायवर्सिटी रिस्क को शामिल करने की बड़ी चुनौती है।
फंड का संकट और रेगुलेटरी रिस्क
समिट का मुख्य फोकस सालाना $200 बिलियन की फंडिंग गैप को भरना है, जिसमें $30 बिलियन की इंटरनेशनल पब्लिक फाइनेंस की आवश्यकता शामिल है। जब ग्लोबल फंडिंग के लक्ष्य पूरे नहीं होते, तो सरकारें अक्सर कड़े पर्यावरण नियम और कंप्लायंस लागू करती हैं। इसका सीधा असर माइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन जैसी इंडस्ट्रीज पर पड़ता है, जिससे कंपनियों का ऑपरेशनल खर्च और कैपिटल स्पेंडिंग बढ़ सकता है।
Amulsar Gold Mine पर विवाद
इस समिट में औद्योगिक विस्तार और संरक्षण के बीच टकराव भी चर्चा में है। एनवायर्नमेंटल ग्रुप्स ने आर्मेनिया की 'Amulsar gold mine' को एक बड़ा उदाहरण बताया है। यह विवाद निवेशकों के लिए एक बड़ा सबक है: जो प्रोजेक्ट्स पर्यावरण के जोखिमों को नजरअंदाज करते हैं, उन्हें अक्सर कानूनी बाधाओं और रेपुटेशन के नुकसान का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि इंस्टीट्यूशनल निवेशक अब संवेदनशील क्षेत्रों में पूंजी लगाने से पहले ESG फैक्टर्स पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।
जैसे-जैसे इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स सख्त होंगे, अच्छी एनवायर्नमेंटल मैनेजमेंट प्रैक्टिस वाली कंपनियां बेहतर स्थिति में रहेंगी। निवेशकों को नई पॉलिसी अपडेट्स और कंप्लायंस नियमों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये आने वाले समय में प्रोजेक्ट्स के रिस्क प्रीमियम को प्रभावित कर सकते हैं।
