यूरोपीय यूनियन का कार्बन टैक्स यानी CBAM अब भारतीय कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर डाल रहा है। साल 2026 में कार्बन की कीमत **€75** प्रति टन से ज्यादा होने के कारण अब निवेशकों को सिर्फ कागजी रिपोर्ट नहीं, बल्कि कंपनियों के असली 'एमीशन कट' पर नजर रखनी होगी।
भारतीय निर्यातकों के लिए सस्टेनेबिलिटी अब सिर्फ एनुअल रिपोर्ट तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह सीधे कंपनी के ऑपरेटिंग कॉस्ट और मुनाफे को प्रभावित करने वाला बड़ा फैक्टर बन चुकी है। साल 2026 में यूरोपीय यूनियन के 'कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म' (CBAM) के पूरी तरह लागू होने के बाद भारतीय औद्योगिक कंपनियों के लिए स्थिति बदल गई है, क्योंकि अब बॉर्डर पर ही कार्बन उत्सर्जन पर टैक्स लगेगा।
मुनाफे पर कैसे पड़ रही है मार?
यह नियम मुख्य रूप से स्टील, आयरन, एल्युमिनियम, सीमेंट, फर्टिलाइजर और हाइड्रोजन जैसे सेक्टरों पर लागू हो रहा है। आसान शब्दों में कहें तो, जो कंपनियां यूरोपीय मार्केट में अपना सामान भेजेंगी, उन्हें कार्बन फुटप्रिंट के आधार पर एक्स्ट्रा लेवी (लेवी) चुकानी होगी। साल 2026 की दूसरी तिमाही के लिए CBAM सर्टिफिकेट की कीमत €75.28 प्रति टन रही है। जो कंपनियां आज भी पुराने और हाई-एमीशन वाले तरीकों से मैन्युफैक्चरिंग कर रही हैं, उनका खर्च बढ़ना तय है।
निवेशकों के लिए इसका मतलब साफ है—कंपनी की 'सस्टेनेबिलिटी' अब उसकी एनर्जी एफिशिएंसी से जुड़ी है। जो कंपनियां रिन्यूएबल एनर्जी या क्लीन टेक्नोलॉजी में निवेश नहीं कर रही हैं, उनके प्रोडक्ट यूरोप में महंगे हो जाएंगे और उन्हें अपना मार्केट शेयर खोना पड़ सकता है।
सिर्फ रिपोर्ट काफी नहीं, रणनीति है असली परीक्षा
भारत में टॉप 1,000 लिस्टेड कंपनियों के लिए BRSR (बिजनेस रिस्पॉन्सबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग) अनिवार्य है। लेकिन डेटा का खुलासा करना और असल में एमीशन कम करना, दो अलग चीजें हैं। हालिया आंकड़े बताते हैं कि फाइनेंशियल ईयर 2025 में 982 बड़ी लिस्टेड कंपनियों का स्कोप 1 और स्कोप 2 एमीशन 4.29% बढ़ गया है। यह दिखाता है कि रिपोर्टिंग के बावजूद कंपनियों को ऑपरेशनल बचत करने में संघर्ष करना पड़ रहा है।
निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?
निवेशक के तौर पर आपको बैलेंस शीट के साथ-साथ इन चीजों पर भी नजर रखनी चाहिए:
- एनर्जी इंटेंसिटी: उत्पादन में बिजली की खपत कितनी है? ज्यादा बिजली खपत मतलब भविष्य में बड़ी लायबिलिटी।
- कैपेक्स (Capex): क्या कंपनी रिन्यूएबल एनर्जी या कार्बन-कैप्चर टेक्नोलॉजी में निवेश कर रही है?
- एक्सपोर्ट मिक्स: अगर कंपनी का एक बड़ा हिस्सा यूरोपीय बाजार में जाता है, तो उस पर जोखिम ज्यादा है। जो कंपनियां घरेलू मार्केट या नॉन-यूरोपीय बाजारों पर फोकस कर रही हैं, वे फिलहाल इस खतरे से बची हुई हैं।
