जलवायु परिवर्तन का असर: तितलियों ने बदली दुनिया भर में अपनी जगह, नई स्टडी का खुलासा

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AuthorNeha Patil|Published at:
जलवायु परिवर्तन का असर: तितलियों ने बदली दुनिया भर में अपनी जगह, नई स्टडी का खुलासा

एक नई स्टडी के अनुसार, दुनिया भर में तितलियों की **80%** प्रजातियां जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों के कारण अपने भौगोलिक क्षेत्रों का विस्तार कर रही हैं, जबकि **27%** प्रजातियों के क्षेत्र सिकुड़ रहे हैं। यह पर्यावरण और कृषि के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

तितलियों के ग्लोबल माइग्रेशन का सच

हाल ही में जारी हुई एक विस्तृत स्टडी में 105 देशों की तितलियों के व्यवहार में बड़े बदलाव सामने आए हैं। रिसर्च के मुताबिक, अध्ययन की गई 1,758 तितली प्रजातियों में से 80% अपनी भौगोलिक सीमा बदल रही हैं। यह वार्मिंग क्लाइमेट और मौसम के बदलते मिजाज का नतीजा है। हालांकि, इस बदलाव के कई पहलू हैं, और 27% प्रजातियों के क्षेत्र सिकुड़ने से उनके स्थानीय तौर पर विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।

कहां हो रहा है सबसे ज्यादा असर?

यह स्टडी दुनिया की लगभग 10% तितली विविधता को कवर करती है। इसमें पता चला है कि करीब 79% प्रजातियां ठंडे इलाकों की ओर बढ़ रही हैं। यूरोप और उत्तरी अमेरिका इन बदलावों के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं। स्वीडन, फिनलैंड, स्पेन, लक्जमबर्ग और चेक गणराज्य जैसे देशों में तितलियों की आबादी में महत्वपूर्ण बदलाव देखे गए हैं। स्वीडन में विस्तार और सिकुड़न दोनों की दरें ऊंची हैं, जबकि यूके और बेल्जियम जैसे देशों में क्षैतिज (horizontal) विस्तार में सबसे ज्यादा कमी देखी गई है।

कुछ पुरानी धारणाओं के विपरीत, ब्राजील और बेनिन जैसे उष्णकटिबंधीय (tropical) इलाकों सहित दुनिया भर में क्षैतिज विस्तार हो रहा है। ये बदलाव अक्सर जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान और वर्षा के पैटर्न में आए बदलावों से जुड़े हैं। उदाहरण के लिए, भारत में 'टॉनी कॉस्टर' तितली को दक्षिण एशिया से ऑस्ट्रेलिया तक अपने क्षेत्र का विस्तार करते हुए देखा गया है, जो प्रति वर्ष लगभग 135 किलोमीटर की गति से बढ़ रही है। यह कुछ प्रजातियों की उच्च गतिशीलता को दर्शाता है, जबकि अन्य पहाड़ी इलाकों में छोटे-छोटे बदलाव कर रही हैं।

कृषि और जैव विविधता पर प्रभाव

बढ़ते तापमान के अलावा, स्टडी में 'मानवीय हस्तक्षेप', 'कृषि' और 'एक्वाकल्चर' को भी उन मुख्य खतरों के रूप में उजागर किया गया है जो तितलियों के क्षेत्रों को सिकोड़ रहे हैं। तितलियों का अध्ययन अक्सर उनके पारिस्थितिक (ecological) महत्व के लिए किया जाता है, लेकिन इन बदलावों का कृषि क्षेत्र के लिए भी व्यापक महत्व है। परागणकों (pollinators) के रूप में, तितलियों के वितरण और जनसंख्या घनत्व में परिवर्तन सीधे प्रभावित क्षेत्रों में फसल की पैदावार और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं।

रिसर्च इस बात पर जोर देती है कि 'माइक्रो-रेफ्यूजिया' (ऐसे छोटे क्षेत्र जो क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन के बावजूद स्थिर रहते हैं) की रक्षा करना जैव विविधता के पतन को रोकने के लिए आवश्यक है। यह स्टडी ऐसे संरक्षण (conservation) की योजना बनाने की वकालत करती है जो पर्यावरणीय परिवर्तन की तेज गति से निपटने के लिए स्थिर मॉडल से आगे बढ़े।

ईएसजी (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) मानदंडों पर ध्यान केंद्रित करने वाले निवेशक और विश्लेषक इस जानकारी को महत्वपूर्ण मान सकते हैं, क्योंकि यह जैव विविधता और कृषि के लिए बढ़ते जलवायु जोखिमों को रेखांकित करता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह रिपोर्ट पर्यावरणीय अनुसंधान से संबंधित है और इसका किसी भी सार्वजनिक रूप से कारोबार वाली कंपनी, स्टॉक या वित्तीय संपत्ति से कोई लेना-देना नहीं है। ये निष्कर्ष व्यापक पारिस्थितिक रुझानों की निगरानी के लिए एक संकेतक के रूप में काम करते हैं जो दीर्घकालिक कृषि स्थिरता और संसाधन प्रबंधन को प्रभावित कर सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.