असम में बाढ़ का कहर जारी है, जिसमें अब तक 78 लोगों की जान जा चुकी है और तीन लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। मौसम विभाग (IMD) ने 1 अगस्त तक असम, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इस संकट से क्षेत्र की कृषि और बुनियादी ढांचे की बहाली पर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं।
असम में बाढ़ का विकराल रूप: 78 की मौत, 3 लाख से ज़्यादा लोग बेघर
असम में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, अब तक 78 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3,00,000 से ज़्यादा निवासी इस विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। हालांकि कुछ इलाकों में पानी का स्तर कम होना शुरू हुआ है, लेकिन प्रशासन आगे की चुनौतियों के लिए तैयार है।
मौसम विभाग की चेतावनी और कृषि पर संकट
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 30 जुलाई से 1 अगस्त तक असम, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड के लिए भारी से बहुत भारी बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की आशंका जताई है। यह स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए एक चिंताजनक स्थिति है, क्योंकि लगातार बारिश से बाढ़ की बहाली के प्रयासों में बाधा आ रही है। खेतों में पानी भरे होने के कारण करीब 21,523 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है, जिससे फसलों को भारी नुकसान का सीधा खतरा है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर चोट और राहत कार्य
कृषि क्षति के अलावा, बाढ़ ने घरों, सड़कों और स्कूलों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को भी तबाह कर दिया है। वर्तमान में, 16,500 से ज़्यादा लोग 71 राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं, जबकि 72,000 से ज़्यादा लोग रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए 30 वितरण केंद्रों पर निर्भर हैं। चराइदेव, शिवसागर और जोरहाट जिले सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं, अकेले चराइदेव में 1.37 लाख से अधिक लोग फंसे हुए हैं।
क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के नज़रिए से, इन लगातार बाढ़ों से निपटने के लिए राज्य और केंद्र सरकारों को बुनियादी ढांचे की मरम्मत और जन कल्याण के लिए निरंतर वित्तीय सहायता की ज़रूरत होगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ मिलकर सहायता और पुनर्वास के प्रयासों का समन्वय कर रहे हैं। मलबे के जमाव और संरचनात्मक क्षति के कारण कई विस्थापित निवासी अपने घरों में लौटने में असमर्थ हैं, जिससे सामान्य स्थिति बहाल होने की समय-सीमा अनिश्चित बनी हुई है।
पूर्वानुमानित बारिश थमने के बाद राहत और पुनर्वास प्रक्रिया की प्रभावशीलता निवेशकों और हितधारकों के लिए मुख्य निगरानी बिंदु रहेगी। ASDMA तिनसुकिया, धीमाजी और लखीमपुर जिलों की लगातार निगरानी कर रहा है, क्योंकि ये क्षेत्र वर्तमान में अनुमानित मौसम की स्थिति के प्रति संवेदनशील हैं। क्षेत्रीय कृषि उत्पादन पर दीर्घकालिक प्रभाव और बुनियादी ढांचे की बहाली की लागत आगामी बारिश की अवधि और तीव्रता पर निर्भर करेगी।
