असम में बाढ़ का कहर जारी है। अब तक 5.24 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं और 68 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, करीब 49,000 हेक्टेयर फसल भूमि को भारी नुकसान पहुंचा है।
Detailed Coverage
असम में बाढ़ का विकराल रूप
असम में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, राज्य के पांच जिलों में 5.24 लाख से अधिक निवासी विस्थापित हो चुके हैं। 26 जुलाई 2026 तक, लगातार हो रही बारिश और बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 68 हो गई है। चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव और शिवसागर जिले इस समय पानी के बढ़ते स्तर से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
खेती और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी मार
कृषि भूमि को भारी नुकसान हुआ है, जिसमें अनुमानित 48,742 हेक्टेयर की फसल भूमि या तो डूब गई है या पूरी तरह से नष्ट हो गई है। खड़ी फसलों का यह नुकसान प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय कृषि उत्पादन और ग्रामीण आजीविका के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। तत्काल मानवीय नुकसान के अलावा, राज्य की सड़कों, पुलों और सुरक्षा तटबंधों सहित महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। इस तरह के विनाश से आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं आती हैं और मरम्मत की लागत बढ़ जाती है, जिसका अल्पावधि में स्थानीय आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
राहत कार्य और बढ़ता खतरा
प्रशासन ने 354 राहत शिविर स्थापित किए हैं, जिनमें 37,700 से अधिक लोगों को शरण दी गई है। सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) द्वारा संयुक्त बचाव और राहत अभियान चलाए जा रहे हैं। हालांकि ये प्रयास तत्काल संकट को स्थिर करने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं, लेकिन नुमालीगढ़ में धनसिरी नदी अपने खतरे के स्तर से ऊपर बह रही है, जिससे और बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है। 760 से अधिक गांवों के डूबने के साथ, स्थानीय आबादी और प्रभावित बुनियादी ढांचे दोनों के लिए पुनर्प्राप्ति प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि पानी कितनी जल्दी कम होता है और परिवहन नेटवर्क और कृषि भूमि में संरचनात्मक अखंडता का कितना जल्दी आकलन किया जाता है।
