ट्रांसमिशन की कमी को दूर करेगा यह बड़ा प्रोजेक्ट
जिम्बाब्वे का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट, करिबा डैम पर 500MW की फ्लोटिंग सोलर कैपेसिटी जोड़ेगा। इसका मुख्य उद्देश्य देश की उन ट्रांसमिशन लाइनों का बेहतर इस्तेमाल करना है जो अपनी 1,200MW की डिजाइन कैपेसिटी के मुकाबले लगभग 20 सालों से 400MW से भी कम पावर ले जा पा रही हैं। इस प्रोजेक्ट के जरिए, कम इस्तेमाल हो रही इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा उठाकर फॉरेन करेंसी में रेवेन्यू जेनरेट करने की योजना है। इससे जिम्बाब्वे इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी (ZETDC) को मजबूत करने और नेशनल ग्रिड को अपग्रेड करने में मदद मिलेगी। प्रोजेक्ट का एक 250MW का पायलट फेज पहले टेस्टिंग और फेज्ड डिप्लॉयमेंट के लिए लॉन्च किया जाएगा।
इकोनॉमी को मिलेगी नई दिशा, फॉरेन करेंसी का होगा इजाफा
इस प्रोजेक्ट में एक अनोखा एक्वाकल्चर (aquaculture) कॉम्पोनेन्ट भी शामिल है, जहाँ फ्लोटिंग सोलर पैनल के नीचे मछलियां पाली जाएंगी। मंत्री मारियान चोम्बो ने बताया कि यह करिबा फिशिंग इंडस्ट्री को रिवाइव करने और डाइवर्सिफाई करने में मदद करेगा, जिससे लोकल जॉब्स और इकोनॉमिक मौके पैदा होंगे। साथ ही, रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल करने वाली माइनिंग और प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज कार्बन क्रेडिट्स के लिए एलिजिबल होंगी, जो ग्लोबल मार्केट में उनकी पोजिशन को मजबूत करेगा। यह भी सुझाव दिया गया है कि कार्बन क्रेडिट्स से होने वाली कमाई का एक हिस्सा करिबा कम्युनिटी के सोशल प्रोजेक्ट्स, यूथ प्रोग्राम्स और कंजर्वेशन एफर्ट्स में रीइन्वेस्ट किया जाएगा। इससे एनर्जी सेल्स और कार्बन मार्केट के जरिए फॉरेन करेंसी अर्निंग बढ़ेगी।
क्लाइमेट चेंज की चुनौतियों से लड़ने की तैयारी
क्लाइमेट चेंज के कारण जिम्बाब्वे के पावर जनरेशन पर बुरा असर पड़ा है, खासकर सूखे और करिबा डैम में पानी का स्तर कम होने से। इस वजह से पावर जनरेशन कैपेसिटी में भारी गिरावट आई है, जो हाल के सालों में 250-350MW और 2023 में कई बार 100MW से भी नीचे रही है। फ्लोटिंग सोलर टेक्नोलॉजी कई फायदे देती है, जैसे जमीन की बचत, पानी के कूलिंग इफेक्ट से पैनल एफिशिएंसी में सुधार और पानी के इवेपोरेशन को कम करना, जो करिबा जैसे डैम के लिए महत्वपूर्ण है जहाँ पानी की कमी है। प्रोजेक्ट का हाइब्रिड डिजाइन दिन की सोलर पावर को रात की हाइड्रोपावर के साथ जोड़ता है, जिससे स्टेबल एनर्जी सप्लाई सुनिश्चित होती है। इससे नई ग्रिड कनेक्शन की जरूरत नहीं पड़ेगी और जिम्बाब्वे अपने कार्बन एमिशन कम करने के लक्ष्यों को पूरा कर सकेगा।
प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग और अहम एग्रीमेंट्स
इस प्रोजेक्ट की इकोनॉमिक सफलता के लिए लगातार इनकम जेनरेट करना जरूरी है। अफ्रीकन एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक (Afreximbank) ने फिजिबिलिटी और बैंकेबिलिटी स्टडीज के लिए $4.4 मिलियन की फैसिलिटी दी है। इंटेंसिव एनर्जी यूज़र्स ग्रुप (Intensive Energy User Group), जो माइनर्स और अन्य इंडस्ट्रियल कस्टमर्स का प्रतिनिधित्व करता है, 20-साल के पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) के तहत पावर खरीदने पर सहमत हो गया है। यह लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट लोन रिपेमेंट और इन्वेस्टर रिटर्न्स के लिए प्रेडिक्टेबल रेवेन्यू सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है।
फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स का बढ़ता ट्रेंड
फ्लोटिंग सोलर इंस्टॉलेशन्स अफ्रीका में तेजी से आम हो रहे हैं, जो जमीन की कमी और ग्रिड स्टेबिलिटी की समस्याओं को हल कर रहे हैं। इजिप्ट और मोरक्को जैसे देश पहले ही इस टेक्नोलॉजी की क्षमता दिखा चुके हैं। यह टेक्नोलॉजी पानी की बॉडीज का उपयोग करती है, जिससे खेती या रहने की जगह के लिए जमीन के साथ कॉम्पिटिशन कम होता है। जिम्बाब्वे का यह प्रोजेक्ट सोलर को हाइड्रोपावर के साथ जोड़कर एनर्जी सोर्स को डाइवर्सिफाई करने और पावर आउटपुट को स्टेबल करने के सफल मॉडल्स को फॉलो करता है।
इकोनॉमिक फैक्टर और पोटेंशियल चैलेंजेस
प्रोजेक्ट की सफलता जिम्बाब्वे की ओवरऑल इकोनॉमिक कंडीशन पर भी निर्भर करती है। करेंसी फ्लक्चुएशन और फंड्स को रिपैट्रियेट करने में दिक्कतें निवेशकों के कॉन्फिडेंस को प्रभावित कर सकती हैं। वहीं, ZETDC के अंदर स्ट्रक्चरल प्रॉब्लम्स, जैसे अपर्याप्त मेंटेनेंस बजट या रेगुलेटरी हर्डल्स, ट्रांसमिशन फीस से पूरे फायदे को सीमित कर सकते हैं। एक्वाकल्चर एलिमेंट प्रोजेक्ट में ऑपरेशनल कॉम्प्लेक्सिटी बढ़ाता है, और सरकारी कॉल्स के अनुसार रेवेन्यू को करिबा कम्युनिटी में रीइन्वेस्ट करने से गवर्नेंस इश्यूज और मिसमैनेजमेंट का रिस्क पैदा हो सकता है।
आगे की राह
करिबा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट के लिए फिजिबिलिटी स्टडीज जारी हैं, और Afreximbank कंसल्टेंट सिलेक्शन प्रोसेस के अंत के करीब है। यह जिम्बाब्वे का पहला ऑपरेशनल फ्लोटिंग सोलर फैसिलिटी होगा, जो एनर्जी डाइवर्सिफिकेशन और एडवांस्ड रिन्यूएबल टेक्नोलॉजीज को अपनाने में एक बड़ा कदम है।