Saudi-backed सेना ने Bab el-Mandeb स्ट्रेट को सुरक्षित करने के लिए नया ऑपरेशन शुरू किया है। इस इलाके में जारी तनाव से शिपिंग रूट और एनर्जी सप्लाई पर बड़ा खतरा पैदा हो गया है, जिसका सीधा असर भारत जैसे देशों के मार्केट पर पड़ सकता है।
यमन के समुद्री तट पर तनाव काफी बढ़ गया है। Saudi-backed सरकारी बलों ने Red Sea के तट पर कब्जा जमाने के लिए आक्रामक अभियान छेड़ दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकारी सैनिक Dhubab जिले के अंदर तक घुस गए हैं और Mocha शहर के बाहरी इलाकों तक पहुंच चुके हैं। यह इलाका वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है, क्योंकि यहीं से 10% से 15% ग्लोबल ट्रेड और दुनिया का बड़ा हिस्सा क्रूड ऑयल और LNG शिपमेंट गुजरता है।
हूतियों की धमकी और मार्केट पर असर
Houthi विद्रोही गुट ने सरकारी दावों को नकारते हुए Saudi अरब के एविएशन और एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की धमकी दी है। इस टकराव से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में चिंता बढ़ गई है। अगर शिपिंग कंपनियों को सुरक्षा के लिए अपना रूट बदलना पड़ा, तो शिपिंग का समय बढ़ेगा, फ्रेट कॉस्ट ऊपर जाएगी और क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आएगा।
भारत के लिए चुनौती
भारत अपनी एनर्जी जरूरतों के लिए इंपोर्ट पर काफी निर्भर है। यदि ऑयल प्राइसेज में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है, तो इसका असर सीधे तौर पर एविएशन, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के मार्जिन पर दिखेगा। फिलहाल, निवेशक इस इलाके की सुरक्षा स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। किसी भी तरह का शिपिंग व्यवधान एनर्जी कमोडिटी मार्केट में बड़ी Volatility पैदा कर सकता है।
