कच्चे तेल में आग! ईरान संकट ने बढ़ाई कीमतें $115 के पार, व्हाइट हाउस की बड़ी तैयारी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
कच्चे तेल में आग! ईरान संकट ने बढ़ाई कीमतें $115 के पार, व्हाइट हाउस की बड़ी तैयारी
Overview

ईरान के साथ बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) के कारण कच्चे तेल (crude oil) की कीमतों में आग लगी हुई है। कीमतें **$115** प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे व्हाइट हाउस (White House) हरकत में आ गया है।

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भू-राजनीतिक तनाव की मार, कच्चे तेल में रिकॉर्ड तेजी

ईरान से जुड़ी सैन्य कार्रवाईयों और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) के चलते कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा उछाल आया है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) फ्यूचर्स $120 प्रति बैरल के करीब पहुंच गए हैं, वहीं ब्रेंट क्रूड (Brent crude) भी $110 के आंकड़े को पार कर गया है। इस खतरनाक स्थिति को देखते हुए अमेरिका का व्हाइट हाउस (White House) हरकत में आ गया है।

व्हाइट हाउस की संभावित चालें: सप्लाई बढ़ाने या कीमतें गिराने की कोशिश

अमेरिकी राष्ट्रपति (President) सोमवार तक एक्सपोर्ट पर रोक (export curbs) और टैक्स में छूट (tax waivers) जैसे उपायों की समीक्षा करने वाले हैं। नवंबर में होने वाले मिड-टर्म चुनावों (midterm elections) को देखते हुए, सरकार पर दबाव है कि वह अमेरिकी व्यवसायों और आम जनता को बढ़ते तेल की कीमतों के आर्थिक झटके से बचाए। साथ ही, जोन्स एक्ट (Jones Act) के नियमों को आसान बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इससे घरेलू शिपिंग लागत कम हो सकती है, हालांकि वैश्विक कीमतों पर इसका कितना असर होगा, यह अभी बहस का विषय है।

G7 देशों की रणनीतिक भंडार से तेल निकालने की चर्चा

इस बीच, ग्रुप ऑफ सेवन (G7) देशों के वित्त मंत्री भी रणनीतिक तेल भंडारों (strategic oil reserves) से कच्चे तेल की मिली-जुली रिलीज पर विचार कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रोटोकॉल के तहत ऐसे कदम सप्लाई में अचानक आई बाधाओं को दूर करने और कीमतों को स्थिर करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, पिछले अनुभव बताते हैं कि ऐसे कदम केवल अस्थायी राहत देते हैं। 2022 में 180 मिलियन बैरल की रिलीज ने केवल 6 हफ्तों तक कीमतों को संभाला था। 400 मिलियन बैरल की प्रस्तावित रिलीज भी वैश्विक मांग के कुछ दिनों की पूर्ति या होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सप्लाई की सीमित अवधि की बाधा को ही कवर कर पाएगी, जो वैश्विक तेल शिपमेंट का लगभग 20% हिस्सा संभालता है।

असल खतरा सप्लाई में रुकावट का: भू-राजनीति हावी

व्हाइट हाउस के प्रयासों और संभावित रिजर्व रिलीज के बावजूद, ईरान संघर्ष से वैश्विक तेल आपूर्ति (global oil supply) को जो वास्तविक खतरा है, वही बाजार को चला रहा है। ईरान के सैन्य और ईंधन सुविधाओं पर हमले, और जवाबी कार्रवाईयों से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल का लगभग 20% हिस्सा बाधित हो गया है। सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और इराक जैसे प्रमुख मध्य पूर्वी उत्पादक देशों ने भी प्रतिबंधों के कारण उत्पादन कम करना शुरू कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा चला, तो कीमतें $120-$150 प्रति बैरल तक जा सकती हैं और यह 'स्टैगफ्लेशन' (stagflation) यानी स्थिर आर्थिक विकास के साथ बढ़ती महंगाई का दबाव भी पैदा कर सकता है। IEA ने भी साफ किया है कि उनका इमरजेंसी सिस्टम कीमत में हस्तक्षेप या दीर्घकालिक सप्लाई प्रबंधन के लिए नहीं है। भू-राजनीतिक तनावों के कारण कीमतों में $4-$10 प्रति बैरल या उससे अधिक का 'रिस्क प्रीमियम' जुड़ सकता है।

भविष्य अनिश्चित: अस्थिरता का दौर जारी

बाजार की भावना (market sentiment) मध्य पूर्व में होने वाले घटनाक्रमों के प्रति बहुत संवेदनशील बनी हुई है। कुछ विश्लेषक मांग और आपूर्ति के सामान्य होने की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन तत्काल भविष्य अत्यधिक अस्थिरता (volatility) से भरा है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने बढ़ती भू-राजनीतिक चिंताओं को वैश्विक विकास के लिए एक बड़ा जोखिम बताया है। चुनाव से पहले ऊर्जा की कीमतें कम करने के लिए सरकारें और हस्तक्षेप कर सकती हैं, लेकिन उनका प्रभाव सप्लाई में व्यवधान के निरंतर खतरे से दब सकता है। ऊर्जा क्षेत्र एक चुनौतीपूर्ण दौर का सामना कर रहा है, जहां सरकारों के रणनीतिक फैसले क्षेत्रीय संघर्षों की कठोर वास्तविकताओं से टकरा रहे हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.