युद्ध, कच्चे तेल का बवाल और IDBI बैंक की रुकी डील
वेस्ट एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने और घरेलू नीतिगत अनिश्चितताओं का असर अब भारतीय कंपनियों पर साफ दिखने लगा है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जाना एक बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर उनके मुनाफे के मार्जिन को कम कर रहा है। साथ ही, IDBI Bank के शेयर में तेज गिरावट की मुख्य वजह सरकार की हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया का रुक जाना है। वहीं, इंजीनियरिंग दिग्गज Larsen & Toubro (L&T) भी संघर्ष क्षेत्र में अपनी बड़ी मौजूदगी के कारण दबाव में है, हालांकि कंपनी की बुनियाद मजबूत बनी हुई है।
कच्चे तेल का शतक और OMCs पर भारी मार
वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष भारतीय शेयरों पर भारी पड़ रहा है, खासकर उन सेक्टरों पर जिनका सीधा जुड़ाव है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $100-103 प्रति बैरल के आसपास चल रही हैं, जो Hindustan Petroleum Corporation (HPCL), Bharat Petroleum Corporation (BPCL) और Indian Oil Corporation (IOC) जैसी OMCs के लिए चिंता का विषय है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि अगर कीमतों में एडजस्टमेंट, टैक्स राहत या सब्सिडी नहीं मिलती है, तो इन कंपनियों की कमाई 90% से 190% तक गिर सकती है। इससे भी बुरी बात यह है कि 28 फरवरी से अब तक OMCs के शेयर 21% से 23% तक गिर चुके हैं, जबकि इसी अवधि में Nifty 500 में 6.5% की गिरावट आई है।
IDBI Bank की हिस्सेदारी बिक्री अटकी, शेयर 36% गिरा
IDBI Bank के शेयर में 36% की बड़ी गिरावट का मुख्य कारण सरकार की 60.7% हिस्सेदारी बेचने की योजना का रुक जाना बताया जा रहा है। सरकार और LIC द्वारा बेची जाने वाली इस हिस्सेदारी के लिए मिले बिड्स, बैंक के ₹1.2 ट्रिलियन के अनुमानित वैल्यूएशन और ₹110 प्रति शेयर के रिजर्व प्राइस से काफी कम थे। निवेशकों की ओर से पर्याप्त रुचि न दिखने के कारण, यह डील अटक गई है, जिससे बैंक के भविष्य की ओनरशिप और उसकी रणनीति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
कंपनियों का वैल्यूएशन और सेक्टर पर असर
OMCs में जोखिम का स्तर अलग-अलग है। HPCL और BPCL अपनी रिफाइनिंग क्षमता की तुलना में ज्यादा रिटेल वॉल्यूम होने के कारण ज्यादा जोखिम में हैं। मार्च 2024 में HPCL का नेट प्रॉफिट मार्जिन नेगेटिव (-1.92%) था, जबकि IOCL का 1.23% और BPCL का 1% से ऊपर था। IOCL को अपने बड़े रिफाइनिंग शेयर के कारण फायदा है, लेकिन सभी कंपनियां ऊंचे कच्चे तेल की कीमतों के दबाव में हैं। इनके मौजूदा प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो बताते हैं कि BPCL करीब 5.27x, HPCL करीब 4.90x और IOC करीब 5.74x पर ट्रेड कर रहे हैं, जो कम वैल्यूएशन दर्शाता है।
IDBI Bank, जिसका P/E रेश्यो करीब 8.8x है, प्राइवेट सेक्टर के HDFC Bank (17.46x) या ICICI Bank (17.42x) जैसे बैंकों की तुलना में काफी कम वैल्यू पर है। विनिवेश की विफलता से सरकारी बैंकों के प्राइवेटाइजेशन की मुश्किलों का पता चलता है। L&T जिस इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में काम करती है, उसका एवरेज रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 10.382% और डेट-टू-इक्विटी रेशियो 0.741 है। L&T की सऊदी अरब में $16 बिलियन की परियोजनाओं से उसका ऑर्डर बुक मजबूत है, लेकिन 3.6 लाख करोड़ (दिसंबर 2025 तक) के इंटरनेशनल ऑर्डर बुक के कारण क्षेत्रीय अस्थिरता से प्रोजेक्ट्स पर असर का जोखिम है।
आगे क्या?
एनालिस्ट्स L&T को लेकर सतर्कता से आशावादी हैं। Emkay Global ने 'Buy' रेटिंग और ₹4,800 का टारगेट प्राइस बनाए रखा है। OMCs के लिए आगे का रास्ता कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगा। IDBI Bank का भविष्य सरकार के अगले कदमों पर निर्भर करेगा, जिसमें देरी या वैकल्पिक विनिवेश रणनीतियां शामिल हो सकती हैं। बाजार तनाव कम होने और भारत की विनिवेश योजनाओं पर स्पष्टता का इंतजार करेगा।
