पश्चिम एशिया में गहराते संकट के कारण भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पर खतरा मंडराने लगा है। भारत अपनी जरूरत का लगभग **88%** क्रूड ऑयल आयात करता है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने के जोखिम को देखते हुए सरकार अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व को मजबूत कर रही है।
भारत के लिए भौगोलिक स्थितियां बहुत संवेदनशील हैं, क्योंकि देश की कुल क्रूड ऑयल मांग का लगभग 88% हिस्सा आयात से पूरा होता है। पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता ने एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और रेड सी में कोई भी बाधा शिपिंग समय और इंश्योरेंस प्रीमियम को बढ़ा सकती है, जिससे सीधे तौर पर भारत में ईंधन की लागत बढ़ेगी।
स्टोरेज का है सहारा
इस अस्थिरता से बचने के लिए सरकार अपने 'स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व' को बढ़ाने पर काम कर रही है। 'इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड' (ISPRL) ने अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के साथ साझेदारी की है, जिससे भारत की क्रूड स्टोरेज क्षमता में इजाफा हुआ है। यह बफर स्टॉक छोटे समय के सप्लाई झटकों को झेलने में मदद करता है।
ऑयल कंपनियों पर निवेशकों की नजर
इस संकट का सीधा असर Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर पड़ेगा। जब ग्लोबल क्रूड महंगा होता है, तो इन कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आता है, क्योंकि वे पूरी लागत ग्राहकों पर नहीं डाल पातीं। इसके अलावा, बढ़ता ऑयल बिल देश के करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को प्रभावित कर सकता है, जिससे रुपये पर दबाव पड़ेगा और महंगाई बढ़ सकती है।
क्या है ऑयल प्रोड्यूसर्स का हाल?
Oil and Natural Gas Corporation (ONGC) जैसी अपस्ट्रीम कंपनियों को ग्लोबल कीमतों में तेजी से फायदा तो हो सकता है, लेकिन 'विंडफॉल टैक्स' (Windfall Tax) उनके मुनाफे पर लगाम लगा देता है। फिलहाल, निवेशक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सरकार की फ्यूल प्राइसिंग नीतियों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
