US के ट्रेड नियमों (Section 232) के चलते Waaree Energies को बड़ा कदम उठाना पड़ा है। कंपनी ने अपने ऑर्डर बुक से **3 GW** के एक्सपोर्ट ऑर्डर हटा दिए हैं, क्योंकि भारत से सोलर मॉड्यूल निर्यात करना अब महंगा हो गया है।
ट्रेड रेगुलेशन का असर
अमेरिका में 'सेक्शन 232' के तहत बदले हुए ट्रेड नियमों और ड्यूटी के चलते भारत से सोलर पैनल का निर्यात करना कंपनी के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। नियमों में बदलाव के कारण कीमतों का जो ढांचा बना, उसके बाद कंपनी ने अपनी ऑर्डर बुक को नई आर्थिक वास्तविकताओं के साथ अलाइन करने के लिए 3 GW के ऑर्डर को हटा दिया है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर मार
इस बदलाव का सीधा असर कंपनी के फाइनेंशियल नतीजों पर पड़ा है। वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में कंपनी का ओवरसीज रेवेन्यू घटकर ₹1,389 करोड़ रह गया, जो पिछले साल इसी दौरान ₹2,875 करोड़ था। भारत से होने वाला निर्यात ₹2,143 करोड़ से गिरकर मात्र ₹89 करोड़ पर आ गया है।
अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग का दांव
इस संकट से निपटने के लिए कंपनी अब अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को अमेरिका के अंदर ही तेजी से बढ़ा रही है। 1.6 GW की मौजूदा क्षमता को बढ़ाकर इस फाइनेंशियल ईयर के अंत तक 4.8 GW करने का लक्ष्य रखा गया है। सितंबर तिमाही में US में बनी यूनिट्स से कंपनी को ₹1,300 करोड़ का रेवेन्यू मिला, जो एक्सपोर्ट में आई कमी की भरपाई करने में काफी मददगार साबित हुआ।
आगे की रणनीति
कुल ऑर्डर बुक अभी भी मजबूत है, जो ₹59,000 करोड़ यानी करीब 25 GW के बराबर है। कंपनी अब अपना ध्यान डेटा सेंटर (Data Center) सेगमेंट की ओर मोड़ रही है, जहां वह सोलर प्लांट और एनर्जी स्टोरेज के जरिए EPC सेवाएं देगी। निवेशकों के लिए अब यह देखना अहम होगा कि कंपनी अपनी US मैन्युफैक्चरिंग को कितनी जल्दी स्केल कर पाती है और डेटा सेंटर बिजनेस से कितनी ग्रोथ हासिल कर सकती है।
