वेदांता के चेयरमैन का NGSL पर आरोप, लेकिन जांच में खुला राज
हाल ही में हुए एक गंभीर प्लांट ब्लास्ट मामले में वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने अपने जॉइंट वेंचर पार्टनर NGSL (NTPC GE Power Services Limited) को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया था। उनका कहना था कि प्लांट का ऑपरेशनल कंट्रोल NGSL के पास था। उन्होंने इस घटना को किसी कुशल ड्राइवर पर भरोसा करने जैसा बताया, जिससे यह इशारा मिला कि यह उनके नियंत्रण से बाहर की बात थी।
फोरेंसिक रिपोर्ट और पुलिस जांच में बड़ा खुलासा
हालांकि, आधिकारिक जांच ने इस कहानी को पलट दिया है। 14 अप्रैल को हुई इस दर्दनाक घटना का कारण हाई-प्रेशर स्टीम ट्यूब में हुआ विस्फोट था। छत्तीसगढ़ पुलिस ने इस मामले में अनिल अग्रवाल और अन्य के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है। फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन का जमा होना और अत्यधिक दबाव विस्फोट के मुख्य कारण थे। पुलिस की मानें तो वेदांता और उसके कॉन्ट्रैक्टर NGSL, दोनों ही अहम मशीनों के मेंटेनेंस (Maintenance) और ऑपरेशनल स्टैंडर्ड्स (Operational Standards) का पालन करने में नाकाम रहे।
पीड़ितों के परिवारों को मिला मुआवजा
इस दुखद हादसे के पीड़ितों के परिवारों के लिए वेदांता ने मुआवजे का ऐलान किया है। मृतक के परिवार को ₹35 लाख और घायलों को ₹15 लाख की आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही, नौकरी का भी सहारा देने की बात कही गई है।
मालिक की जवाबदेही पर सवाल
यह घटना इस बात पर प्रकाश डालती है कि भले ही ऑपरेशनल काम किसी स्पेशलाइज्ड जॉइंट वेंचर को आउटसोर्स किया गया हो, लेकिन आखिर में संपत्ति के मालिक (Asset Owner) की जवाबदेही सबसे ऊपर होती है। NTPC और Tata Power जैसी बड़ी कंपनियां आमतौर पर या तो अपने मजबूत इंटरनल ऑपरेशनल टीम रखती हैं या फिर बाहरी प्रोवाइडर्स पर सख्त निगरानी रखती हैं।
