Vedanta Oil & Gas का दमदार Profit, ₹945 करोड़ का मुनाफा, पर एसेट बिक्री का रहा बड़ा असर

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Vedanta Oil & Gas का दमदार Profit, ₹945 करोड़ का मुनाफा, पर एसेट बिक्री का रहा बड़ा असर

Vedanta Oil & Gas ने जून तिमाही में **₹945 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले घाटे से एक बड़ा उलटफेर है। हालाँकि, यह मुनाफा मुख्य रूप से एसेट बेचने से मिले **₹1,056 करोड़** के एकमुश्त लाभ से आया है, जबकि कंपनी के मुख्य परिचालन राजस्व (revenue) और मार्जिन (margins) पर दबाव देखा गया।

एसेट बिक्री से चमकी Vedanta Oil & Gas

Vedanta Oil & Gas ने 29 जुलाई 2026 को अपनी पहली तिमाही के नतीजे जारी किए, जिसमें कंपनी ने ₹945 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दिखाया है। यह एक बड़ी राहत की बात है, क्योंकि पिछली तिमाही में कंपनी को ₹476 करोड़ का घाटा हुआ था। लेकिन, गहराई से देखें तो यह मुनाफा कंपनी के मुख्य कारोबार के बजाय एकमुश्त कॉर्पोरेट सौदों का नतीजा है।

₹1,056 करोड़ का एकमुश्त लाभ

कंपनी के मुनाफे में उछाल का मुख्य कारण ₹1,056 करोड़ का एक बड़ा नॉन-रिकरिंग (non-recurring) लाभ है। यह लाभ कंपनी द्वारा अपने पावर, निकोमेट और कोक बिजनेस डिवीजनों की स्लम्प सेल (slump sale) के जरिए हुई बिक्री से आया है। स्लम्प सेल में कंपनी अपने पूरे व्यापार को एकमुश्त कीमत पर बेच देती है। जब बिक्री से मिली रकम, बैलेंस शीट पर मौजूद संपत्ति के मूल्य से ज़्यादा होती है, तो अतिरिक्त राशि को एकमुश्त लाभ के तौर पर दर्ज किया जाता है, जिसने जून तिमाही के नेट प्रॉफिट को काफी बढ़ाया।

Cambay ब्लॉक पर ₹441 करोड़ का झटका

इसके विपरीत, कंपनी को ₹441 करोड़ के एक एक्सेप्शनल लॉस (exceptional loss) का भी सामना करना पड़ा। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा ₹379 करोड़ का इम्पेयरमेंट चार्ज (impairment charge) था, जो Cambay ऑयल एंड गैस ब्लॉक से जुड़ा था। यह एडजस्टमेंट दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें सरकार के प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट (Production Sharing Contract) की अवधि बढ़ाने से इनकार करने के फैसले को हरी झंडी मिल गई थी। इम्पेयरमेंट चार्ज तब लगता है जब किसी संपत्ति से होने वाली भविष्य की कमाई कम हो जाती है और कंपनी को उसकी वैल्यू कम करनी पड़ती है। Vedanta Oil & Gas इस कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील कर रही है।

मुख्य कारोबार में गिरावट

खास सौदों को छोड़ दें तो, कंपनी के मुख्य बिजनेस के आंकड़े दबाव में दिखे। परिचालन से होने वाले रेवेन्यू में पिछली तिमाही की तुलना में 3.1% की गिरावट आई और यह ₹2,507 करोड़ रहा। मुख्य बिजनेस की प्रॉफिटेबिलिटी भी घटी, जहाँ EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन से पहले की कमाई) 7.7% घटकर ₹814 करोड़ रह गया। नतीजतन, EBITDA मार्जिन, जो बिजनेस की ऑपरेटिंग एफिशिएंसी बताता है, घटकर 32.5% पर आ गया, जो मार्च तिमाही के 34.1% से कम है। निवेशक कंपनी के मौजूदा कारोबार की सेहत जानने के लिए इन आंकड़ों पर बारीकी से नजर रखते हैं।

यह तिमाही Vedanta Oil & Gas के लिए खास रही, क्योंकि यह डीमर्जर (demerger) के बाद कंपनी की पहली वित्तीय रिपोर्ट है। ऑयल एंड गैस बिजनेस का डीमर्जर 1 मई 2026 से प्रभावी हुआ था। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 24 जुलाई 2026 को इस कॉर्पोरेट रीस्ट्रक्चरिंग को मंजूरी दी थी। चूँकि हाल के नतीजों पर नॉन-कोर एसेट्स की बिक्री और कानूनी विवादों का बड़ा असर रहा है, निवेशक अगले कुछ तिमाहियों पर नज़र रखेंगे कि क्या कोर ऑयल एंड गैस ऑपरेशंस, एकमुश्त लाभ के सहारे के बिना, अपने रेवेन्यू को स्थिर कर सकते हैं और ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार कर सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.