वेदांता ऑयल एंड गैस (Vedanta Oil & Gas) के शेयरों में आज **5%** की तेजी देखी गई। दिल्ली हाई कोर्ट ने कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाया है, जिससे करीब **₹950 करोड़** (99 मिलियन डॉलर) के आर्बिट्रल अवार्ड पर सरकार की चुनौती खारिज हो गई है। यह फैसला 2014 से चले आ रहे रवि ऑयल फील्ड (Ravva oil field) से जुड़े प्रॉफिट-शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट विवाद को खत्म करता है।
कोर्ट से वेदांता को मिली बड़ी राहत!
दिल्ली हाई कोर्ट ने वेदांता लिमिटेड के ऑयल एंड गैस डिविजन को बड़ी राहत देते हुए ₹950 करोड़ (99 मिलियन डॉलर) के आर्बिट्रल अवार्ड के खिलाफ केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी है। इस फैसले के बाद वेदांता ऑयल एंड गैस के शेयरों में 5.2% की जोरदार तेजी आई और शेयर ₹38.39 पर ट्रेड करने लगे। यह अवार्ड रवि ऑयल फील्ड (Ravva oil field) के प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा एक पुराना विवाद है।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद 2014 में शुरू हुआ जब भारत सरकार ने वेदांता और उसके पार्टनर रवि ऑयल से 99 मिलियन डॉलर की मांग की थी। इसके जवाब में, कंपनियों ने आर्बिट्रेशन का रास्ता अपनाया। 2016 में आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने कंपनियों के पक्ष में फैसला सुनाया। हालांकि, सरकार ने इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, उनका तर्क था कि यह पब्लिक पॉलिसी के खिलाफ है और कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों को बदलता है। लेकिन कोर्ट ने अब आर्बिट्रल अवार्ड को बरकरार रखा है, जिसे पहले मलेशियाई कोर्ट से भी मंजूरी मिल चुकी थी।
प्रोडक्शन पर क्या है असर?
जहां यह कानूनी जीत कंपनी के लिए एक बड़ा वित्तीय बूस्ट है, वहीं निवेशक कंपनी के हालिया प्रोडक्शन पर भी नजर बनाए हुए हैं। पहली तिमाही (Q1) के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी का औसत डेली ग्रॉस प्रोडक्शन 17% घटकर 77.7 हजार बैरल ऑफ ऑयल इक्विवेलेंट प्रति दिन (kboepd) रह गया। ऑयल एंड गैस सेगमेंट का कुल वॉल्यूम भी पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 17% कम रहा। शेयरधारकों के लिए चुनौती यह है कि वे इस एकमुश्त कानूनी लाभ को प्रोडक्शन में चल रही गिरावट के साथ कैसे संतुलित करते हैं।
आगे क्या देखना होगा?
अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी अपने आगामी फाइनेंशियल स्टेटमेंट में इस ₹950 करोड़ के इनफ्लो को कैसे दर्ज करती है और इसका कैश फ्लो पोजीशन पर क्या असर पड़ता है। साथ ही, कंपनी की अपनी प्रमुख ऑयल फील्ड्स में प्रोडक्शन लेवल को स्थिर करने या सुधारने की क्षमता लंबे समय की ग्रोथ के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेगी। एक दशक पुराने कानूनी मामले के खत्म होने से रवि फील्ड में प्रॉफिट-शेयरिंग व्यवस्थाओं से जुड़ी अनिश्चितता दूर हो गई है। आगे यह देखना अहम होगा कि मैनेजमेंट इन पैसों का इस्तेमाल कैसे करता है और क्या इस भुगतान के लागू होने में कोई और रेगुलेटरी बाधाएं आती हैं।
