Orissa High Court ने Vedanta Aluminium की याचिका खारिज कर दी है, जिससे कंपनी पर ओडिशा माइनिंग कॉर्पोरेशन (OMC) को **₹5,600 करोड़** चुकाने का दबाव बढ़ गया है। पेमेंट की आखिरी तारीख **31 अक्टूबर, 2026** तय की गई है।
कानूनी पेंच और भारी जुर्माना
Orissa High Court ने साल 2004 के बॉक्साइट सप्लाई एग्रीमेंट को फिर से लागू करने की Vedanta Aluminium Ltd. की मांग को पूरी तरह से ठुकरा दिया है। इस फैसले के साथ ही Odisha Mining Corporation (OMC) की ओर से मांगी गई ₹5,600 करोड़ की राशि अब कंपनी के लिए एक बड़ी देनदारी बन गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 2015 में Mines and Minerals (Development and Regulation) Act में हुए बदलावों के बाद यह एग्रीमेंट पहले ही खत्म हो चुका था।
निवेशकों के लिए दो बड़ी चिंताएं
निवेशकों के लिए इस खबर के साथ दो बड़े जोखिम उभर कर आए हैं:
- कैश फ्लो पर दबाव: ₹5,600 करोड़ की एकमुश्त पेमेंट कंपनी की बैलेंस शीट और लिक्विडिटी पर सीधा असर डालेगी।
- ऑपरेशनल लागत में बढ़ोतरी: अब तक कंपनी पुराने फिक्स्ड रेट्स पर बॉक्साइट हासिल कर रही थी, जिससे उसे काफी सस्ता कच्चा माल मिल रहा था। अब उसे बाजार भाव या ऑक्शन के जरिए बॉक्साइट खरीदना होगा, जिससे आने वाली तिमाहियों में कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन (Operating Margin) पर तगड़ा दबाव देखने को मिल सकता है।
आगे का रास्ता?
फिलहाल कंपनी इस कानूनी आदेश की समीक्षा कर रही है। सूत्रों की मानें तो Vedanta इस फैसले के खिलाफ Supreme Court में अपील कर सकती है ताकि पेमेंट डिमांड पर स्टे (Stay) लिया जा सके। फिलहाल बाजार की नजरें इस पर टिकी हैं कि कंपनी अपनी रॉ मटेरियल प्रोक्योरमेंट स्ट्रेटेजी में क्या बदलाव करती है और कैसे बढ़ती इनपुट कॉस्ट को मैनेज करती है।
