Uranium Corporation of India Limited (UCIL) ने अपने 60 साल पूरे कर लिए हैं और अब कंपनी देश में न्यूक्लियर फ्यूल (Nuclear Fuel) का उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रही है। निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि यह सरकारी कंपनी स्टॉक मार्केट में लिस्टेड नहीं है।
अपनी 60वीं वर्षगांठ के मौके पर Uranium Corporation of India Limited (UCIL) ने भविष्य के लिए बड़ा रोडमैप तैयार किया है। डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी के तहत काम करने वाली यह कंपनी अब भारत के न्यूक्लियर रिएक्टर्स की फ्यूल जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी कैपेसिटी बढ़ाएगी।
मोनोपॉली और नई तकनीक
Atomic Energy Act के तहत देश में यूरेनियम की माइनिंग का एकाधिकार (Monopoly) UCIL के पास है। कंपनी अब अपनी पुरानी माइनिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने और प्रोसेसिंग एफिशिएंसी को बेहतर करने पर जोर दे रही है। इसका मकसद केवल खुदाई करना नहीं, बल्कि पूरी फ्यूल सप्लाई चेन को तकनीक के साथ मजबूत करना है।
क्या है जादुगोड़ा का प्लान?
कंपनी ने अपनी डीप माइनिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए करने का भी फैसला किया है। जादूगोड़ा (Jaduguda) माइन में 815 मीटर की गहराई पर एक 'डार्क मैटर लैबोरेटरी' (Dark Matter Laboratory) बनाने की संभावना पर स्टडी की जा रही है, जो भविष्य में एक बड़ा वैज्ञानिक कदम हो सकता है।
निवेशकों के लिए जरूरी सलाह
बाजार के जानकारों और रिटेल निवेशकों को स्पष्ट रूप से समझना चाहिए कि UCIL एक पूरी तरह से सरकारी अनलिस्टेड कंपनी है। यह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) या बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड नहीं है। अक्सर ट्रेडर्स 'UCIL' नाम के शॉर्टकट के कारण अन्य छोटी लिस्टेड कंपनियों के साथ भ्रमित हो जाते हैं, लेकिन असल में UCIL के शेयरों में कोई भी पब्लिक ट्रेडिंग उपलब्ध नहीं है।
सेक्टर के नजरिए से देखें तो न्यूक्लियर फ्यूल का बिजनेस बेहद कैपिटल-इंटेंसिव और कड़े सरकारी नियमों वाला है। आने वाले समय में कंपनी की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि वह अपने मॉर्डनाइजेशन प्लान को कितनी तेजी से लागू कर पाती है और विदेशी फ्यूल पर भारत की निर्भरता को कम करने में कितनी सफल होती है।
