यूक्रेन ने आधिकारिक रूप से सीजफायर को खत्म कर दिया है और रूस के रियाजान स्थित Rosneft रिफाइनरी पर ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं। इस घटना ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
यूक्रेन ने रूस के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर फिर से सीधे हमले शुरू कर दिए हैं, जिसके साथ ही हालिया सीजफायर की उम्मीदें खत्म हो गई हैं। गुरुवार को रियाजान क्षेत्र में स्थित Rosneft की एक बड़ी रिफाइनरी को ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया। यह फैसिलिटी रूस की कुल रिफाइनिंग क्षमता का लगभग 5% हिस्सा संभालती है और राजधानी के लिए ईंधन की मुख्य सप्लाई चेन है।
ग्लोबल मार्केट पर असर
इन हमलों ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में तुरंत हलचल पैदा कर दी है। इतिहास गवाह है कि रूसी रिफाइनिंग क्षमता में किसी भी तरह की बाधा डीजल और कच्चे तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता लाती है। भारतीय बाजार के लिए, जो कच्चे तेल के आयात पर बहुत अधिक निर्भर है, ग्लोबल कीमतों में कोई भी बढ़ोत्तरी एक बड़ी चिंता का विषय है। अगर ग्लोबल क्रूड महंगा होता है, तो इसका सीधा असर भारत के इंपोर्ट बिल पर पड़ता है, जो घरेलू ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित कर सकता है।
कूटनीतिक मोर्चे पर क्या बदला?
अमेरिका के कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद सीजफायर पूरी तरह से टूट चुका है। राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने साफ कर दिया है कि संयम अब उनकी रणनीति का हिस्सा नहीं है। इसके अलावा, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम को लेकर भी तनाव की खबरें आ रही हैं, जिसका असर रक्षा ऑपरेशंस पर पड़ने की बात कही जा रही है।
निवेशकों के लिए सबक
बाजार के जानकारों का मानना है कि अब तनाव अपने चरम पर है। निवेशक अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि क्या ये हमले रूसी फ्यूल एक्सपोर्ट को व्यापक स्तर पर बाधित करेंगे या ये सीमित रहेंगे। यूरोपीय संघ के नेता फिलहाल एयर डिफेंस और एनर्जी सिक्योरिटी पर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती, एनर्जी सेक्टर में भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिल सकती है।
