रूस द्वारा यूक्रेन की **10** से अधिक ऊर्जा सुविधाओं पर मिसाइल हमले किए गए हैं, जिससे **5 लाख** घरों की बत्ती गुल हो गई है। इस तनाव ने ग्लोबल कमोडिटी बाजार में हलचल पैदा कर दी है, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए मुद्रास्फीति (Inflation) का खतरा बढ़ गया है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष एक बार फिर बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। 19 अक्टूबर, 2026 को रूस ने यूक्रेन के पावर ग्रिड को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस हमले का सबसे बुरा असर खार्किव, निप्रो और ओडेसा जैसे बड़े शहरों पर पड़ा है, जहां बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
ग्लोबल मार्केट और कच्चे तेल पर असर
निवेशकों की नजरें अब ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) और नेचुरल गैस की कीमतों पर टिकी हैं। हालांकि यूक्रेन सीधे तौर पर बड़ा तेल उत्पादक नहीं है, लेकिन क्षेत्र में तनाव बढ़ने से ग्लोबल सप्लाई चेन पर संकट के बादल मंडराने लगते हैं। ट्रेडर्स इसे 'रिस्क प्रीमियम' के तौर पर देख रहे हैं, जिससे कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव की आशंका है।
भारत के लिए क्या हैं खतरे?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ना या शिपिंग और इंश्योरेंस कॉस्ट में इजाफा सीधा भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव डालता है। इसके चलते:
- इंपोर्टेड इन्फ्लेशन: घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल और कमोडिटी की कीमतें बढ़ सकती हैं।
- सेक्टर पर मार: ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और केमिकल जैसे ऊर्जा-गहन (Energy-intensive) सेक्टर के ऑपरेटिंग कॉस्ट में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
- करंट अकाउंट प्रेशर: आयात बिल बढ़ने से विदेशी मुद्रा भंडार और करंट अकाउंट पर अतिरिक्त दबाव पड़ना तय है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में ग्लोबल एनर्जी एजेंसीज के बयानों और सप्लाई चेन सिक्योरिटी को लेकर आने वाली रिपोर्ट्स ही मार्केट की दिशा तय करेंगी। निवेशकों को अब क्रूड ऑयल बेंचमार्क पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यही सबसे पहले जियोपॉलिटिकल रिस्क का संकेत देते हैं।
