बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए अमेरिकी सरकार ने अपने इमरजेंसी रिजर्व से **300,000** बैरल हीटिंग ऑयल जारी करने का फैसला लिया है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे आम जनता पर महंगाई की मार बढ़ गई है।
तेल का 'लोन' और सरकारी रणनीति
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी ने 'नार्थईस्ट होम हीटिंग ऑयल रिजर्व' से 300,000 बैरल तेल निकालने की अनुमति दी है। यह कुल 10 लाख बैरल के इमरजेंसी स्टॉक का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है। गौरतलब है कि हाल ही में हीटिंग ऑयल और डीजल की कीमतें $6.50 प्रति गैलन के स्तर को पार कर गई हैं, जिसकी मुख्य वजह ईरान से जुड़ा भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव और वैश्विक स्तर पर फ्यूल सप्लाई में आ रही बाधाएं हैं।
किन कंपनियों को मिला फ्यूल?
इस योजना के तहत 4 बड़ी ऊर्जा कंपनियों - Global Companies LLC, Sprague Operating Resources LLC, Trafigura Trading LLC और Vitol Inc. को यह फ्यूल दिया गया है। इन कंपनियों को 6 नवंबर तक बोस्टन और न्यू हेवन के बाजारों में इसकी डिलीवरी सुनिश्चित करनी होगी।
यह एक 'लोन' (Loan) मॉडल है, यानी यह तेल की बिक्री नहीं है। इन कंपनियों को 2027 के पीक हीटिंग सीजन से पहले अतिरिक्त प्रीमियम के साथ इस तेल को वापस सरकारी रिजर्व में जमा करना होगा। इस मैकेनिज्म से सरकार का भंडार सुरक्षित रहेगा।
बाजार पर असर और चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सर्दियों में आने वाली सप्लाई की किल्लत को कम करने के लिए है, लेकिन मांग की तुलना में यह मात्रा काफी कम है। इससे स्पॉट प्राइस में कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है, लेकिन बुनियादी समस्याएं जैसे कि मिडिल ईस्ट की अस्थिरता और पाइपलाइन से जुड़ी बाधाएं अभी भी बरकरार हैं। ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता के चलते फ्यूल की कीमतें आगे भी दबाव में रह सकती हैं।
