US फोर्सेज ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में ईरान के **3** ऑयल टैंकरों को तबाह कर दिया है। यह कार्रवाई IRGC द्वारा अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल हमले के बाद की गई है, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चैन खतरे में पड़ गई है।
मिडिल ईस्ट में हालात एक बार फिर बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। 5 सितंबर, 2026 को अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने ईरान के तीन ऑयल टैंकरों को निशाना बनाया। यह कदम IRGC (Islamic Revolutionary Guard Corps) द्वारा अमेरिकी नेवी के दो युद्धपोतों पर किए गए बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के जवाब में उठाया गया है। पेंटागन के मुताबिक, 'M/T Downy' और 'M/T Stark 1' नाम के टैंकर पूरी तरह से बेकार हो चुके हैं, जबकि 'M/T Kylo/Noxen' नाम का एक और टैंकर ओमान की खाड़ी में नष्ट कर दिया गया है।
ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के लिए तेल सप्लाई का सबसे अहम रास्ता है। इस समुद्री रास्ते के युद्ध का मैदान बनने से क्रूड ऑयल के बेंचमार्क में बड़ी हलचल तय मानी जा रही है। सुरक्षा कारणों से अब शिपिंग और इंश्योरेंस प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जो सीधे तौर पर कच्चे तेल की लैंडेड कॉस्ट को प्रभावित करेगा।
भारतीय निवेशकों के लिए रिस्क
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है। यदि क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आता है, तो भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के मार्जिन पर भारी दबाव पड़ सकता है। अगर कंपनियां इस लागत को ग्राहकों तक नहीं पहुंचा पाती हैं, तो उनके नेट प्रॉफिट पर सीधा असर पड़ेगा। साथ ही, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी कंपनियों को भी ऊंचे ऑपरेशनल खर्चों का सामना करना पड़ सकता है।
फिलहाल मार्केट एक्सपर्ट्स की नजरें Brent और WTI क्रूड के भाव पर टिकी हैं। निवेशकों के लिए सलाह है कि वे ग्लोबल पावर और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की ओर से आने वाले बयानों पर नजर रखें, क्योंकि यह तनाव इक्विटी और कमोडिटी मार्केट में बड़ी अस्थिरता पैदा कर सकता है।
